UP: महिला पुलिसकर्मियों के लिए थानों में नहीं हैं अलग शौचालय, हाईकोर्ट नाराज   

प्रयागराज: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब से प्रदेश के मुखिया बने हैं, तब से वह महिलाओं के हित में काम कर रहे हैं। प्रदेश में महिलाओं को ध्यान में रखकर विभिन्न योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन लॉ कॉलेज की छात्राओं की एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से एक भी शौचालय नहीं हैं। महिला पुलिसकर्मियों को फ्रेश होने के लिए शर्मसार होना पड़ता है। यह रिपोर्ट देश के अलग-अलग लॉ कॉलेज में पढ़ाई कर रही 12 छात्राओं ने अपने प्रोजेक्ट वर्क को तैयार करते हुए बनाई है।

छात्राओं ने थानों का मुआयना कर तैयार की रिपोर्ट

छात्राओं ने इसके लिए प्रदेश के थानों का मुआयना किया और रिपोर्ट तैयार की। लॉ की छात्राओं की रिपोर्ट से पता चला कि यूपी के थानों में आने वाली महिलाओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। इक्का-दुक्का महिला टॉयलेट आपको थाने में दिख जाएंगे, लेकिन इसे भी महिला पुलिसकर्मियों ने खुद के पैसे से बनवाया है।

गंदगी इतनी कि हो जाए संक्रमण

एक तो महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से शौचालय नहीं है और जो हैं भी उनकी दशा अब ऐसे हो गई है कि इसमें महिला पुलिसकर्मी फ्रेश नहीं हो सकती हैं। महिला शौचालय न होने से महिला पुलिसकर्मियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही ये टॉयलेट इतने गंदे हैं कि यहां फ्रेश होने पर महिलाओं को संक्रमण भी हो सकता है। गौरतलब है कि महिलाओं के लिए हाईजीन का विशेष महत्व होता है।

1425 थानों में नहीं है महिला टॉयलेट

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 1425 पुलिस थानों में महिलाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है। इतने बड़े प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से शौचालय न होना चिंता का विषय है। ऐसा नहीं है कि महिला पुलिसकर्मियों और थाने में शिकायत लेकर आने वाली महिलाओं के बारे में कभी सोचा नहीं गया। वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने थानों में महिलाओं के लिए अलग से शौचालयों के लिए बजट पास किया था, लेकिन 20 साल के बाद भी महिलाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं बन सका।

हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

इस मामले पर अब हाईकोर्ट भी नाराज हो गया है। हाइकोर्ट ने इस दिशा में तेजी से काम करने के लिए यूपी सरकार को आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि महिलाओं के हित में तेजी से संवेदनशील होकर काम करने की जरूरत है। 16 मार्च को अगली सुनवाई से पहले कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है। बता दें कि हाईकोर्ट में इस मामले में लॉ छात्राओं ने वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता और ह्यूमन राइट्स लीगल नेटवर्क के अध्यक्ष कमल कृष्ण राय की सलाह पर एक जनहित याचिका दाखिल की है।

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