कानपुर में मनाया गया ऐतिहासिक हटिया होली मेला, जानिए क्या है इसका इतिहास

कानपुर: हटिया होली मेला कानपुर में हर वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन शहर भर के लोग रज्जन बाबू पार्क, हटिया में इकट्ठा होते हैं। जहां से रंगों का ठेला निकाला जाता है। युवाओं के बीच इसको लेकर खासी दिलचस्पी देखने को मिलती है।

आजादी और हिंदू मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक

यह पूरा ऐतिहासिक मेला अंग्रेजों के जमाने से चला रहा है। इसके माध्यम से आजादी की मशाल लोगों के बीच जलाई जाती है और हिंदू मुस्लिम भाईचारे का भी संदेश दिया जाता है। अंग्रेजों ने इस पर उस समय रोक लगा दी थी।

जिसके बाद कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई लेकिन यह मेला आज भी अपनी उपस्थिति कानपुर में दर्ज करवाता है। देशभक्ति गीतों के बीच लोग रंगों का ठेला लेकर गलियों में निकलते हैं। कई क्षेत्रीय व्यक्ति और युवा बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

पारंपरिक पगड़ी पहन कर युवाओं ने किया प्रतिभाग

बड़े बूढ़े और युवा सभी इस ऐतिहासिक मेले में शामिल होते हैं। रंगों का त्योहार और बाद में होली मिलन मनाने के लिए हटिया होली मेले का विशेष महत्व है। पारंपरिक पगड़ी पहन कर एक दूसरे के बीच भाईचारे का संदेश देकर इस मेले को सफल बनाया जाता है, इसे गंगा मेला भी कहा जाता है।

इस आयोजन में रंग का ठेला भी निकाला जाता है, जिसका अलग आनंद है। इसे भैंसा ठेले पर शहर वासियों के लिए निकाला जाता है। ड्रम में रंग भर कर सभी होली खेलते हैं और देशभक्ति के तराने पर झूमते हैं। इसके साथ ही भाईचारे और एकता की मिसाल भी इस मेले में देखने को मिलती है।

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