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लखनऊ: सियासत की मेहरबानी से हिस्ट्रीशीटर का दामन साफ

सियासत की मेहरबानी से हिस्ट्रीशीटर का दामन साफ

लखनऊ: 80 के दशक से सियासत के गलियारे में जरायम का सिक्का बुलंद था। सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। तो कुछ अपराधियों को जेल की चाहर दीवारों में कैद कर दिया गया ।

लेकिन आज भी उनका रसूख जेल की सलाखों के भीतर भी कायम है। जिसका असर पंचायत चुनाव में देखने को मिला है। असल में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिह की पत्नी श्रीकला ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जीत हासिल कर वर्चस्व के मैदान में सामने आई।

इसके लिए बीजेपी के सहयोगी अपना दल से समर्थन मिला। श्रीकला की जीत के जश्न में धनंजय सिंह शामिल नहीं हो पाएंगे। उस वक्त वह फरार थे और यूपी पुलिस धनंजय की तलाश में छापेमारी कर रही थी। जबकि राजधानी के गैंगस्टर लल्लू यादव की पत्नी नीतू यादव पंचायत चुनाव में निर्विरोध बीडीसी चुनीं गई है।

लेकिन काकोरी से ब्लॉक प्रमुख पद के लिए उन्होने बीजेपी का दामन थामा है। लिहाजा, सियायत की मेहबानी में कुख्यात अपराधी अपने दामन को साफ करना चाहते हैं। यही वजह है कि अपराधियों ने घर की महिलाओं को सियासत के मैदान में खड़ा किया है।

ऊंचे घराने से ताल्लुक रखती है श्रीकला

दरअसल, मऊ जनपद के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अजीत सिहं हत्याकांड में धनंजय सिंह का नाम साजिशकर्ता के रूप में आया था। इसके बाद धनंजय सिंह ने कोर्ट में सरेंडर किया था। इससे पहले भी धनंजय सिहं जेल जा चुके हैं।

पूर्व सांसद पर शिक्षक गोविंद उनियाल की हत्या का आरोप लगा था। लेकिन पुलिस को धनंजय सिंह के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले थे। इसके बाद धनंजय सिंह ने ठेकेदारी की दुनिया में पांव रख दिया। यहीं से धनंजय सिंह के ऊपर कई संगीन मामले जुड़ते चले गए। साल 1997 में धनंजय ने पुलिस ने समाने सरेंडर कर दिया था।

सूत्रों के मानें तो श्रीकला धनंजय सिंह की तीसरी पत्नी हैं। श्रीकला के पिता का रसूख किसी से कमन नहीं है। उनके पिता तेलंगाना राज्य में एक विधायक रह चुके हैं। तो वहीं बताया जा रहा है कि निप्पो बैटरी के घराने से ताल्लुक रखने वाली श्रीकला ने अमेरिका से आर्किटेक्चरल इंटीरियर डिजाइनर की पढ़ाई की है। हाल ही में दोनो ने ही शादी की थी।

बीजेपी का थामा दामन

इस बार राजधानी में गैंगस्टर लल्लू यादव की पत्नी नीतू यादव पंचायत चुनाव में निर्विरोध बीडीसी चुनी गई हैं। अब काकोरी से ब्लॉक प्रमुख पद के लिए बीजेपी की उम्मीदवार हैं।

जबकि लल्लू यादव के अपराधिक इतिहास को हर कोई भली भांति जानता है। लल्लू यादव पर हत्या, जानलेवा हमला, अवैध कब्जा, गैंगस्टर और मारपीट के अलावा गुंडा एक्ट जैसे कई संगीन मुकदमें दर्ज हैं। लल्लू यादव का जेल बैरक व उसकी सलाखों से गहरा नाता रहा है।

बतातें चलें कि जब लल्लू यादव उर्फ पहलवान को राजनीतिक पार्टी से सहयोग मिला तो उनसे अपने पैर पसारने शुरु कर दिए। साल 2010 में लल्लू यादव जिला पंचायत सदस्य रहा और साथ ही उसकी पत्नी नीतू यादव काकोरी ब्लॉक से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुनी गई। तो वहीं साल 2015 में लल्लू यादव की छबीली फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हुई। इस फिल्म में माफिया ने ग्राम प्रधान की भूमिका निभाई थी।

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