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जिंदगी में कभी भी बुरा वक्त आये तो कुछ गलत करने से पहले महाभारत की इन बातों को याद कर लेना..

mahabhart 1 जिंदगी में कभी भी बुरा वक्त आये तो कुछ गलत करने से पहले महाभारत की इन बातों को याद कर लेना..

इस धरती पर जिस भी जीव ने जन्म लिया है उसने जीवन में कष्ट जरूर उठाये हैं। दुनिया में मौजूद सभी जीवों में मनुष्य सबसे बुद्धिमान कहा जाताहै। यही कारण है कि, जब भी मनुष्य पर कोई आफत टूटती है तो वो सही फैसले लेने की जगह भावनाओं में बहकर कुछ गलत फैसले कर बैठता है। और यही फैसले आगे चलकर उसके लिए मुसीबत बनते हैं।

problem 1 जिंदगी में कभी भी बुरा वक्त आये तो कुछ गलत करने से पहले महाभारत की इन बातों को याद कर लेना..
अगर आप भी इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहे हैं और आपको चाहकर भी कोई रास्ता नहीं मिल रहा है तो कुछ भी गलत करने से पहले महाभारत की इन अहम बातों पर जरूर नजर डाल लेना। आप भी सोच रहे होंगे जिस महाभारत में अपने ही अपनों के कातिल बन गये थे वो महाभारत सही फैसले लेने में मदद कैसे कर सकती है।

चलिए आपको बताते हैं महाभारत की कुछ खास बातें जो आपको मुश्किल वक्त से बाहर निकाल देंगी।

किसी भी हाल में अपना कर्तव्य पूरा करें
महाभारत काल में जब अर्जुन को अपने ही परिजनों के खिलाफ युद्ध करना पड़ता तो वह असंमजस की स्थिति में थे। लेकिन श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश के दौरान उन्‍हें अपने क्षत्रिय धर्म की याद द‍िलाई। साथ ही यह भी कहा क‍ि धर्म का निर्वहन करने के लिए यदि अपने प्रियजनों के खिलाफ भी लड़ना पड़े तो हिचकना नहीं चाहिए।
यह बात आज के समय में यह सबक देती है क‍ि कभी किसी भी र‍िश्‍ते में अगर फैसला लेना मुश्किल हो तो केवल अपने कर्तव्‍य और धर्म के बारे में सोचें और आगे बढ़ें।

निस्वार्थ दोस्ती
महाभारत का वक्‍त हो या आज का लेकिन र‍िश्‍ता जीवन में हो तो मुश्किलें बड़ी आसानी से हल हो जाती हैं। मसलन कृष्ण और अर्जुन की दोस्ती हर काल के लिए एक उदाहरण है। वह कृष्ण का नि:स्‍वार्थ प्रेम और प्रेरणा ही थी जिसने पांडवों को युद्ध में विजय द‍िलाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका न‍िबाही थी।

अधूरा ज्ञान सबसे बड़ा दुश्मन
महाभारत काल की एक और घटना आज के वक्‍त में महत्‍वपूर्ण सबक है। अभिमन्यु की कहानी। जो क‍ि हमें यह बताती है क‍ि कैसे आधा-अधूरा ज्ञान हमें खत्‍म तक कर सकता है। क्‍योंक‍ि अभिमन्यु जब देवी सुभद्रा की कोख में थे तो वह अपने प‍िता अर्जुन और माता की बात से चक्रव्यूह में कैसे प्रवेश करना है यह तो जान गए थे। लेकिन जब अर्जुन चक्रव्‍यूह तोड़ने का जिक्र कर रहे थे तो सुभद्रा को नींद आ गई। इसके चलते अभिमन्‍यु चक्रव्यूह से बाहर आने के बारे में नहीं जान सके। इसी अधूरे ज्ञान का खामियाजा उन्‍हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

लालच सबसे बुरी आफत
महाभारत का युद्ध भी टाला जा सकता था। अगर धर्मराज युद्धिष्ठिर पर लालच न हावी हुआ होता तो यह युद्ध टल सकता था। उनके इसी लालच को जुएं में शकुनी ने भुनाया और उनसे राज-पाठ और धन-दौलत तो छीना ही। साथ ही उनकी पत्‍नी द्रौपदी को भी जीत ल‍िया। इसलिए कहा जाता है क‍ि कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। अन्‍यथा जीवन में कई मुश्‍किल हालात का सामना करना पड़ता है।

बदलेगा की भावना कर देगी बर्वाद
यह तो सभी जानते हैं क‍ि महाभारत युद्ध का मुख्‍य कारण बदले की भावना थी। कौरवों की पांडवों को बर्बाद करने की सनक ने ही उनसे उनका सबकुछ छीन लिया। महाराज धृतराष्‍ट्र के सभी पुत्र कुरुक्षेत्र में मारे गए। लेकिन इस महाविनाश से पांडव भी नहीं बच पाए। इस युद्ध में द्रौपदी के पांचों पुत्र सहित अर्जुन-सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु भी मारे गए।

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अगर आप भी जिंदगी की उलझनों में उलझे हुए हैं तो कोई भी कदम उठाने से पहले सोच-समझ लें। क्योंकि आपका एक फैसला आपोक पूरा जीवन बदल सकता है।

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