जानिए- कानून में रेप को किस तरह से किया गया है परिभाषित और क्या है सजा का प्रावधान?

इन दिनों देश में रेप को लेकर सरकार और प्रशासन संवेदन शील है। लेकिन अपराध और अपराधी बेलगाम होकर इस अमानवीय कृत्य को करते जा रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो की माने तो देश में हर 15 मिनट पर एक बलात्कार हो रहा है। इसके साथ ही महिलाओं के खिलाफ छेड़छाड और शीलभंग जैसे कृत्यों की भी भरमार हो चुकी है। सरकार कानूनों को कठोर करती जा रही हैं। लेकिन अपराधी अपराध करने से बाज नहीं आ रहें। आखिर इस तरह महिलाओं के लिए घरों के बाहर निकलना ही दुस्वार होता जा रहा है। ये नर पिचाश महिलाओं ही नहीं बल्कि छोटी मासूम बच्चियों तक को अपनी हवस का शिकार बना उनकी हत्या तक कर देते हैं। कई मामलों में लोग इन केसों को घर की इज्जत के नाम पर दबा देते हैं।

 

 

कई बार ऐसे मामलों में अपने करीबी और रिश्तेदार तक मासूमों और महिलाओं को हवस का शिकार बनाते हैं। भारतीय कानून में इसे संज्ञेय और गैरजमानतीय अपराध की श्रेणी में रखते हुए कठोरतम सजा का प्रावधान जोड़ा गया है। लेकिन कई बार हम कानून की अधूरी जानकारी के चलते इन मामलों में ढील कर देते हैं। कई बार इस तरह की चीजें होने पर कानून के दरवाजों तक हम नहीं लेकर जाते हैं। लेकिन अब जानिए आखिर रेप के लिए कानून में क्या कहा गया है।

आईपीसी 375 में बलात्कार को परिभाषित किया गया
बलात्कार को आईपीसी की धारा 375 में परिभाषित किया गया है। इसमें साफ लिखा है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी महिला के साथ अपने लिंग को किसी भी हद तक उस महिला के मुंह, योनि, मूत्रमार्ग अथवा गुदा में प्रवेश कराता है या कोशिश करता है या फिर किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है तो वह बलात्कार होता है।

 

इसके साथ ही बलपूर्वक महिला के शरीर में अपने शरीर के किसी भी भाग को तोड़ मरोड़ कर उसके मूत्रमार्ग, योनि, गुदा या शरीर के किसी भी भाग में प्रवेश कराता है या उस महिला को उसके साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है तो वह बलात्कार की श्रेणी में आता है।

 

इसके साथ ही अपने मुंह को महिला के मूत्रमार्ग, योनि या गुदा, पर लगाना या फिर अपने हाथों से छूना उसके साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए प्रेरित करना भी बलात्कार होता है।

 

बलात्कार निम्न परिस्थितियों को भी देखता है, कि जिसमें उस स्त्री की इच्छा के विरुद्ध। उस स्त्री की सहमति के बिना। उस स्त्री की सहमति से जबकि उसकी सहमति, उसे या ऐसे किसी व्यक्ति, जिससे वह हितबद्ध है, को मॄत्यु या चोट के भय में डालकर प्राप्त की गई है। उस स्त्री की सहमति से, जबकि वह पुरुष यह जानता है कि वह उस स्त्री का पति नहीं है और उस स्त्री ने सहमति इसलिए दी है कि वह विश्वास करती है कि वह ऐसा पुरुष है। जिससे वह विधिपूर्वक विवाहित है या विवाहित होने का विश्वास करती है।

 

उस स्त्री की सहमति के साथ, जब वह ऐसी सहमति देने के समय, किसी कारणवश मन से अस्वस्थ या नशे में हो या उस व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्रबन्धित या किसी और के माध्यम से या किसी भी बदतर या हानि कारक पदार्थ के माध्यम से, जिसकी प्रकृति और परिणामों को समझने में वह स्त्री असमर्थ है। उस स्त्री की सहमति या बिना सहमति के जबकि वह 18 वर्ष से कम आयु की है। उस स्त्री की सहमति जब वह सहमति व्यक्त करने में असमर्थ है।

 

375 आईपीसी में ये है अपवाद

इसके साथ ही उक्त प्रकरण में सहमति का मतलब महिला शब्द, इशारों या किसी भी प्रकार के मौखिक या गैर-मौखिक संवाद से विशिष्ट यौन कृत्य में भाग लेने की इच्छा व्यक्त करे। इसके अलावा अगर कोई महिला किसी का शारीरिक रूप से प्रवेश के लिए विरोध नहीं करती है तो केवल इस तथ्य के आधार पर इस तरह की यौन गतिविधियों के लिए उसकी सहमति नहीं मानी जा सकती है। क्योंकि उसे ऊपर बतायी गई परिस्थितियों के तहत इस संबंध के लिए बाध्य किया जा सकता है। इसके साथ ही इसमें एक अपवाद है कि किसी डॉक्टर जो कि उसका परीक्षण या चिकित्सा कर रहा हो जिसमें यौन संक्रमण आदि जैसी बिमारियां हो उसे छोड़कर। इसके साथ ही पति और पत्नी के बीच बनने वाले शारीरिक संबंध जिसमें पत्नी की उम्र 18 साल से कम ना हो।

 

376 आईपीसी में है सजा का प्रावधान

लेकिन बलात्कार की रेप का प्रावधान आईपीसी की धारा 376 में अलग-अलग क्रमों में दिया गया है। जो कि निम्म हैं,उपबंध 1 के अलावा किसी महिला के साथ किया गया बलात्संग हर तरह से दंडनीय अपराध है। जिसके लिए 7 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। लेकिन अगर वह स्त्री जिससे ये संबंध बनाया गया है वह उसकी पत्नी है, इसके साथ ही अगर उसकी उम्र 18 से कम है तो भी यह बलात्कार की श्रेणी में आता है। लेकिन इसमें सजा महज 2 साल और जुर्माना है। इसके अलावा किसी स्त्री से, जो बारह वर्ष से कम आयु की है, बलात्कार करेगा या सामूहिक बलात्कार करेगा। इसके साथ ही किसी गर्भवती महिला के साथ बलात्कार किया गया हो ऐसी स्थिति में आरोप सिद्ध होने पर कठोर कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन हो सकेगी दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। इसके साथ ही इस धारा में दण्ड के अलग-अलग प्रावधान हैं।

 

धारा 376 (क) भारतीय दंड संहिता

पृथक रहने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ सम्भोग करने की दशा में वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

 

धारा 376 (ख) भारतीय दंड संहिता

लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में किसी स्त्री के साथ सम्भोग करने की दशा में जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की ही हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

 

धारा 376 ग भारतीय दंड संहिता

जेल, प्रतिप्रेषण गृह आदि के अधीक्षक द्वारा सम्भोग की स्थिति में वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

 

धारा 376 घ भारतीय दंड संहिता

अस्पताल के प्रबंधक या कर्मचारीवृन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ सम्भोग करेगा तो वह दोनों में किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

 

धारा 377 भारतीय दंड संहिता

प्रकृति विरुद्ध अपराध के बारे में है जो यह बताती है कि जो कोई किसी पुरुष, स्त्री या जीव वस्तु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इन्द्रिय-भोग करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।