उत्तर प्रदेशः फतेहपुर जिले के बहुआ ब्लाक के सरकारी स्कूल में शराब पीता है शिक्षक

प्रदेश के मुखिया योगी आदित्य नाथ सूबे के प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा में सुधार लाने का हर संभव प्रयास कर रहे है। लेकिन स्कूल के शिक्षक सुधरने का ना नहीं ले रहे हैं, और नशे में टल्ली होकर बच्चो को शिक्षा देने पहुंचते है।जिससे गांव वालों ने बच्चो को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।फतेहपुर जिले के बहुआ ब्लाक के श्यामखेड़ा विद्यालय के प्राथमिक विद्यालय को देखिये जहां स्कूल के प्रिंसिपल साहब प्राथमिक विद्यालय में ही महखाना सजाकर बच्चो को शिक्षा देने में लगे हुए हैं।

 

उत्तर प्रदेशः फतेहपुर जिले के बहुआ ब्लाक के सरकारी स्कूल में शराब पीता है शिक्षक

महखाने की शिकायत शिक्षक विभाग के अधिकारियो से ग्रामीणों ने शिकायत की लेकिन उसमे कोई सुधार नहीं आया है

प्रिंसिपल साहब के स्कूल में महखाने की शिकायत शिक्षक विभाग के अधिकारियो से ग्रामीणों ने शिकायत की लेकिन उसमे कोई सुधार नहीं आया है। वहीं आज नशे में धुत्त प्रिंसिपल साहब ने स्कूल की ही शिक्षा मित्र के साथ बत्सालुखी करने लगे जिसको देख ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा काटना शुरू कर दिया। हंगामा की सुचना जैसे ही शिक्षा विभाग के अधिकारियो को लगी तो आनन फानन स्कूल पहुंच जांच में जुट गए जहां प्रिंसिपल साहब ने अपने महखाने को सजा रखा था। जिसे देख शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यवाही करने की बात कहने लगे।

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प्रिंसिपल साहब रोज शराब की बोतल लेकर स्कूल आते है और यही पर शराब पीते है

वहीं महिला शिक्षामित्र की माने तो प्रिंसिपल साहब रोज शराब की बोतल लेकर स्कूल आते है और यही पर शराब पीते है। और बच्चो से पानी और खाने का सामान मंगवाते है।जिसको देखते हुए बहुत से लोगो ने बच्चो को स्कूल भेजना बंद कर दिया। आज प्रिंसिपल साहब ने हाथ पकड़ लिया जिसका विरोध किया तो गांव वाले इकठा हो गए। वहीं गांव वालो का आरोप है की शराबी प्रिंसिपल साहब की वजह से बच्चो को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। इनका हर रोज स्कूल में ही महखाना शुरू हो जाता हैं।जिससे बच्चो को भी इसकी लत ना लग जाये इसी लिए छोड़ दिया हैं ।

सरकार शिक्षकों को लाखो रुपये वेतन देकर शिक्षा की गुणवक्ता सुरधाने में लगी है

वहीं इस बारे में सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी से बात की तो उनका कहना था की ग्रामीणों द्वारा बीएसए साहब से शिकायत की गई थी। जिसकी जांच कर उन्हें बता दिया गया है ।सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की सरकार शिक्षकों को लाखो रुपये वेतन देकर शिक्षा की गुणवत्ता सुरधाने में लगी है ।लेकिन शिक्षक सरकार पैसो से नशे में टल्ली होकर शिक्षा देने में लगे हुए है। जब टल्ली शिक्षक इसी तरह से स्कूल जायेंगे तो कैसे कोई अपने बच्चो को शिक्षा के मंदिर में भेजेगा यह अपने आप पर बड़ा सवाल हैं।

मुमताज़ अहमद