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महाभारत के वो बड़े श्राप  जिन्होंने बदल दी महाभारत की पूरी कहानी..

mhabhart 1 महाभारत के वो बड़े श्राप  जिन्होंने बदल दी महाभारत की पूरी कहानी..

कोरोना वायरस के चलते पूरे देशभर में लॉकडाउन लगा हुआ है। इस बीच टीवी पर सालों पुरानी रामायण और महाभारत का प्रसारण किया जा रहा है। जिसको दर्शकों को खूब प्यार मिल रहा है।

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इस बीच लोग महाभरतच से जुड़े हुए किस्से कहानी जानना चाहते हैं। आज हम आपको महाभारत के ऐसे बड़े शापों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसने पूरी महाभारत को ही पलट कर रखा दिया।

महाभारत में वैसे तो सैकड़ों शाप और वरदान मिल जाएंगे लेकिन हम यहां कुछ प्रमुख शाप के बारे में ही बताएंगे, जो बहुत ही चर्चित रहे हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यदि ये शाप नहीं होते तो महाभारत के युद्ध का परिणाम और भारतीय इतिहास का मोड़ कुछ अलग ही होता। चलिए आपको ऐसे ही बड़े शापों से रूरू करवाते हैं।

1-‘द्यु’ का शाप
एक बार ‘द्यु’ नामक वसु ने वशिष्ठ ऋषि की कामधेनु का हरण कर लिया। इससे वशिष्ठ ऋषि ने द्यु से कहा कि ऐसा काम तो मनुष्य करते हैं इसलिए तुम आठों वसु मनुष्य हो जाओ। उन आठ वसुओं में से एक भीष्म थे। गंगा ने आठ में से सात वसुओं को जल में बहा दिया लेकिन शांतनु के बोलने के कारण भीष्म बच गए। भीष्म ने ब्रह्मचारी रहने की शपथ ली थी।

2-युधिस्ठर ने कुंती को दिया शाप
महाभारत युद्ध समाप्त हुआ तो माता कुंती ने पांडवो के पास जाकर उन्हें यह रहस्य बताया की कर्ण उनका भाई था। सभी पांडव इस बात को सुनकर दुखी हुए। युधिस्ठर ने विधि-विधान पूर्वक कर्ण का अंतिम संस्कार किया तथा शोकाकुल होकर माता कुंती के समीप गए व उसी क्षण उन्होंने समस्त स्त्री जाती को यह श्राप दे डाला की आज से कोई भी स्त्री किसी भी प्रकार की गोपनीय बात का रहस्य नहीं छुपा पाएगी।

3-कर्ण का शाप
परशुराम ने शपथ ली थी की ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना में सिर्फ किसी ब्रह्मज्ञानी को ही सिखाऊंगा। कर्ण यह सीखना चाहता था तो उसने परशुराम के पास पहुंचकर खुद को ब्राह्मण का पुत्र बताया और उनसे यह विद्या सीख ली। परशुराम को जब यह पता चला की कर्ण को सूर्यपूत्र है तो उन्होंने कर्ण को शाप दे दिया कि जब भी तुम्हें इस विद्या की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी, तभी तुम इसे भूल जाओगे।

4-अर्जुन को मिला शाप
एक बार अर्जुन इन्द्र-सभा में थे। अर्जुन के रूप सौंदर्य पर मोहित हो उर्वशी नामक अप्सरा ने उनसे प्रणय निवेदन किया। किंतु अर्जुन ने उन्हें मां समान मानकर इस निवेदन को ठुकरा दिया। तब उर्वशी ने क्रोधित होकर अर्जुन को 1 वर्ष तक नपुंसक होने का शाप दे दिया। अर्जुन ने उर्वशी से शापित होना स्वीकार किया, परंतु संयम नहीं तोड़ा।

5-भगवान कृष्ण को मिला शाप
महाभारत युद्ध के पश्चात सांत्वना देने के उद्देश्य से भगवान श्रीकृष्ण गांधारी के पास गए। भगवान श्रीकृष्ण को देखते ही गांधारी ने क्रोधित होकर उन्हें शाप दिया कि तुम्हारे कारण जिस प्रकार से मेरे 100 पुत्रों का नाश हुआ है, उसी प्रकार तुम्हारे वंश का भी आपस में एक-दूसरे को मारने के कारण नाश हो जाएगा।

6-अश्वत्थामा को श्रीकृष्ण ने क्यों दिया था शाप?
महाभारत के युद्ध में अश्वत्‍थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया था जिसके चलते लाखों लोग मारे गए थे। अश्वत्थामा के इस कृत्य से श्री कृष्ण ने क्रोधित होकर शाप दिया कि ‘तू इतने वधों का पाप ढोता हुआ 3,000 वर्ष तक निर्जन स्थानों में भटकेगा। तेरे शरीर से सदैव रक्त की दुर्गंध नि:सृत होती रहेगी। तू अनेक रोगों से पीड़ित रहेगा।’

7-यमराज को किसने दिया शाप?
महाभारत में मांडव्य ऋषि का वर्णन आता है। एक बार राजा ने भूलवश न्याय में चूक क़र दी और अपने सेनिको को ऋषि मांडव्य को शूली में चढ़ाने का श्राप दिया। परन्तु जब बहुत लम्बे समय तक भी शूली में लटकने पर ऋषि के प्राण नहीं गए तो राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ तथा उन्होंने ऋषि मांडव्य को शूली से उतरवाया तथा अपनी गलती की क्षमा मांगी। इसके बाद ऋषि माण्डव्य यमराज से मिलने गए तथा उनसे पूछा की किस कारण मुझे झूठे आरोप में सजा मिली।

जब आप 12 वर्ष के थे तो आपने एक छोटे से कीड़े के पूछ में सीक चुभाई थी जिस कारण आपको यह सजा भुगतनी पड़ी। तब ऋषि माण्डव्य ने यमराज से कहा की किसी को भी 12 वर्ष के उम्र में इस बात का ज्ञान नहीं रहता की क्या धर्म है और क्या अधर्म. क्योकि की तुमने एक छोटे अपराध के लिए मुझे बहुत बड़ा दण्ड दिया है अतः में तुम्हे श्राप देता हु की तुम शुद्र योनि में दासी के पुत्र के रूप में जन्म लोगे। माण्डव्य ऋषि के इस श्राप के कारण यमराज को विदुर के रूप में जन्म लेना पडा।

https://www.bharatkhabar.com/mata-vaishno-devi-temple-set-an-example-of-communal-unity/
तो देखा आपने किस तरह महाभारत के बड़े पात्रों को एक दूसरे के द्वारा ही शापित किया गया था। आपको बता दें, सतयुग में यदि कोई किसी के दिल को दुखाता था तो वो उसे बदुआ दे दिया करता था। जिसकी वजह शापित व्यक्ति कष्टों भरा जीवन जीती था।

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