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पर्यावरण दिवस: 49 सालों में कितने जागरुक हुए हम, कटते जंगलों को क्यों नहीं रोक पाए ?

earth day environment पर्यावरण दिवस: 49 सालों में कितने जागरुक हुए हम, कटते जंगलों को क्यों नहीं रोक पाए ?

हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।

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आज के समय में बढ़ते पॉल्यूशन ही बढ़ती बीमारियों का मुख्य कारण है। आज हमारे आस-पास पेड़ कम गाड़ियां ज्यादा हैं। लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है लेकिन फिर भी पेड़ों का कटान बंद नहीं हो रहा। एक सड़क बनाने के लिए या एक फेक्ट्री लगाने के लिए जंगल के जंगल तबाह कर दिए जाते हैं। एक साथ हजारों पेड़ों को काटा जाता है। यही कारण है कि आज हर दिन पॉल्यूशन का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

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पर्यावरण दिवस से क्या जागरुक हुए हम

हम लोग इतने सालों से 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते आए हैं। लेकिन आज के दिन अगर पेड़ लगाने की बात कहते हैं तो कल को अपने किसी फायदे के लिए हजारों पेड़ों की बली दे देते हैं। सालों से यही होता आया है और आगे भी शायद ऐसा ही हो। हमारी गलती और हमारा लालच हमपर ही भारी पड़ रहा है।

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आज हमारे शरीर में अनगिनत बीमारियों का वास हो चुका है। बावजूद इसके हमें न तो पेड़ लगाने हैं और न ही उन्हें कटने से बचाना है। बस साल में आज ही का वो दिन है जब हम पेड़ों के बारे में और पर्यावरण के बारे में सोचते हैं। बाकी कल से हम लोगों को किसी चीज से कोई परवाह नहीं होगी। सब लोग अपने-अपने कामों में व्यवस्थ हो जाएंगे और जंगल इसी तरह से पत्थरों के खंडहरों में तब्दील होते जाएंगे।

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हर कोई ये सोचकर जी लेता है कि एक पेड़ कटने से क्या हो जाएगा। सालों से हमारी इसी सोच ने आज जंगलों को काटकर वहां पत्थरों की दीवार खड़ी कर दी है। हमारी इसी सोच ने पर्यावरण को इतना दूषित कर दिया है कि हर दिन धूंध की चादर सूरज की किरणों को भी जमीन पर गिरने नहीं देती। दिल्ली जैसे शहर में लोगों का जीना मुहाल हो रहा है।

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बहरहाल हर दिन प्रदूषण की बढ़ती मात्रा लोगों के सेहत पर गहरा असर डाल रही है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने आस-पास पेड़ लगाएं और वातावरण को साफ शुद्ध रखकर खुद को घातक बीमारियों से बचाएं।

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