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MSME 2021: लॉकडाउन के बाद भी बाजार में नहीं है प्रोडक्ट की डिमांड, जाने और क्या आ रही समस्याएं

MSME 2021: लॉकडाउन के बाद भी बाजार में नहीं है प्रोडक्ट की डिमांड, जाने और क्या आ रही समस्याएं

लखनऊ: MSME से जुड़े तमाम उद्योगों पर भारत खबर लगातार बड़े उद्मियों से बात कर रहा है। हमने यह जानने का प्रयास किया कि कोरोना काल में उद्योग के क्षेत्र में क्या असर पड़ा। कोरोना से सिर्फ छोटे उद्यमी ही परेशान हुए या इसका असर बड़े उद्मियों पर भी पड़ा। हमारी इस विशेष श्रंखला में आपकों को उद्योग क्षेत्र की मौजूदा हालत उन्हीं के जुबानी सुनाने का हमारा यह छोटा सा प्रयास। सबसे पहले हमने MSME के उद्योगों का हाल जानने के लिए प्रशांत पुनिधर से बात की है।

MSME पर आगे हमने प्रशांत पुनिधर से

MSME से जुड़े उद्योग पर प्रशांत पुनिधर ने सरकार पर तो खुलकर ज्यादा कुछ नहीं बोला पर वह सरकारी नीतियों से खुश नहीं है। उन्होने कहा अधिकारियों के हाथ बंधे हुए है। कोविड से पहले और बाद में उद्योग जगत में काफी बड़े बदलाव आ गए है। छोटे और बड़े उद्योग वालों को सामंजस बैठाना होगा। यह समय उद्योग के लिए बहुत बुरा साबित हुआ। लेकिन अब उम्मीद है कि धीरे-धीरे यह समय बीत जाएगा। और उद्योग जगत फिर से अपनी पुरानी फार्म में लौट आएगा।

सरकार को मदद करनी होगी

प्रशांत पुनिधर ने कहा उद्योग के लिए समय अच्छा नहीं है। ऐसे में सरकार को आगे आकर मदद करनी होगी। देश का यह उद्योग पूरी तरह से बैक के कर्जे पर चलता है। तो सबसे पहले छोटे उद्मियों राहत देने की जरूरत है। बैक अभी से अपनी रिकवरी के लिए जुट गए है। बैक को किश्ते जमा कराने के लिए कम से कम साल भर की मोहलत देनी होगी।

जीएसटी और नौकरशाही

उद्योग जगत को जीएसटी फाइल करने में काफी समस्या आ रही है। जीएसटी के साथ ही बिजली कनेक्शन की समस्या से भी उद्यमी परेशान है। नए बिजली कनेक्शन के लिए उद्मियों को काफी दौड़ भाग करनी पड़ती है। सरकार तो इस मामले में कई तरह की योजना लेकर आई है। लेकिन छोटे उद्यमी नौकरशाही के आगे पीछे दौड़ भाग कर-कर के थक जाते है। अब उद्योग चलाने वाला एक ही काम कर सकता है। या तो वह सरकारी ऑफिसों के चक्कर लगा ले या फिर अपने उद्योग और कंपनी पर ध्यान दे ले। सरकार को इस मामले पर संज्ञान लेने की जरूरत है।

अरविंद कुमार ने इस श्रंखला में कई गंभीर मुद्दे पर राय रखी

अरविंद कुमार जो कि टूरिज्म और हॉस्पिटिलिटी कॉमिटी के चेरयरमैन है। बात करने पर अरंविद कुमार ने कहा कोरोना काल से पहले उद्योग क्षेत्र लगभग सभी तरह की कंपनियां अच्छा कर रही थी। बाजार में प्रोडक्ट की डिमांड थी। पैसा भी रोटेट हो रहा था। लेकिन कोरोना की पहली वेव और लॉकडाउन ने सब स्थिर कर दिया। देश में अचानक बंदी से इस पूरे उद्योग 60 से 70 फीसदी नुकसान झेलना पड़ा। हां कुछ कंपनियों को फायदा भी हुआ। जो कंपनियां मेडिकल और इससे संबधी सामग्री सैनेटाइजर-मास्क-दवाओं का उत्पादन करती है उनको जरूर हुआ।

प्रोडक्ट की डिमांड एकदम से कम हुई

कोरोना काल के बाद जब बाजार और उद्योग दोबारा से शुरू हुए तो मार्केट से प्रोड्क्ट की डिमांड ना के बराबर हो गई। अब जब बाजार से हमारे पास डिमांड ही नहीं आएगी तो हम उद्योग में गिरावट आनी तय है। हमें उम्मीद है कि अब बाजार दोबारा से खुल गए है। महीने दो महीने के समय के बाद अगर प्रोडक्टर की डिमांड आने लगती है तो उद्योग क्षेत्र के लिए अच्छा होगा।

एमएसएमई के इस खास दिन पर आगे हमने सतीश भटनागर से बात की

सतीश भटनागर ने कहा MSME पर कहा सरकार से इस क्षेत्र को कोई खास मदद नहीं मिली है। इस उद्योग के लोगों को लेकर सरकार के पास कोई स्कीम भी नहीं है। पहले लॉकडाउन के बाद जरूर कुछ राहत मिली थी। जब बैकों ने अपनी किश्तों में पांच से छह महीनों की छूट दे दी थी।

सरकार अपनी वसूली पूरी कर रही है

सतीश भटनागर ने आगे कहा लॉकडाउन में कंपनियों को सरकार का निर्देश था कि वह मजूदरों और काम करने वालों लोगों का पैसा नहीं रोकेगी। वैसा ही किया गया सभी का पैसा टाइम पर दिया गया। लेकिन इन उद्योगों को चलाने वालों को कोई राहत नहीं दी गई। सरकार ने अपनी तरफ से भी कोई राहत नहीं दी।

सरकार ने जीएसटी-टैक्स-बिजली का बिल सब टाइम पर ले लिया। यहां तक बैकों ने भी अपनी रिकवरी शुरू कर दी। अब जब किसी कंपनी का कोई प्रोडक्ट बाजार में गया ही नहीं तो वह बैक की किश्ते समय पर कैसे पूरी भर पाएगा। सरकार को बैकों से थोड़ी राहत की गुजारिश करनी चाहिए कि नए उद्मियों के लिए इसमें कुछ समय दिया जाना चाहिए।

कच्चा माल अचानक से मंहगा हुआ

सतीश भटनागर ने आगे कहा कि लॉकडाउन हटने के बाद अचनाक से कच्चे माल के दामों में बढोत्तरी हुई है। कच्चे माल के दाम लगभग 60 से 70 फीसदी तक बढ़ गए है। देश में लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ रहे है और कंपनियों को डीजल की जरूरत होती है। हर कंपनी लगभग डीजल पर ही चलती है तो ऐसे में डीजल इतना महंगा हो गया है। और बाजार में डिमांड है नहीं तो यह समय उद्मियों के लिए काफी कठिन और संघर्ष पूर्ण है।

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