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सांसद जगदंबिका पाल को हुआ कोरोना, खुद को किया क्वारंटीन, जानिए कैसे आए चपेट में

सांसद जगदंबिका पाल को भी हुआ कोरोना, खुद को किया क्वारंटीन, जानिए कैसे आए चपेट में

लखनऊ: तमाम फिल्मी सितारों को चंगुल में लेने के बाद कोरोना वायरस अब राजनेताओं को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। कोरोना वायरस ने अब डुमरियागंज से सांसद जगदंबिका पाल को अपनी गिरिफ्त में ले लिया है।

सांसद जगदंबिका पाल बंगाल से लौटने के बाद कोरोना संक्रमित हो गए हैं। बीजेपी नेता बंगाल में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने गए थे। इसी दौरान उन्हें कोरोना हो गया। मामले की जानकारी साझा करने के बाद यूपी के एक दिन के सीएम ने खुद को क्वारंटीन कर लिया है।

एक दिन के लिए बने थे सीएम

बता दें 1998 में यूपी के तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह को राज्यपाल रोमेश भंडारी ने रातों-रात बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद आनन-फानन में राज्यपाल ने लोकतांत्रिक कांग्रेस के नेता जगदंबिका पाल को सीएम पद की शपथ दिलाई गई थी।

इसके अगले दिन ही अल्पमत में आए कल्याण सिंह सुप्रीम कोर्ट चले गए थे और कोर्ट ने कंपोजिट फ्लोर टेस्ट का फैसला सुनाया था। इसके बाद कल्याण सिंह ने एक बार फिर से बहुतम साबित करते हुए सत्ता हासिल कर ली थी। इस प्रकार जगदंबिका पाल मात्र एक दिन के लिए ही यूपी का मुख्यमंत्री बन पाए थे।

जांच में हो रही लापरवाही

बता दें कि यूपी में तेजी से कोरोना अपने पैर पसार रहा है। राजधानी लखनऊ में तो हाल और भी बुरा है। यहां पर तेजी से कोरोना के मरीज सामने आ रहे हैं। कोरोना संक्रमितों के कारण कोविड की जांच के लिए तेजी से लोग अस्पतालों में उमड़ रहे हैं।

लखनऊ में कोविड को लेकर जांच में लापरवाही सामने आ रही है। लखनऊ के लोहिया संस्थान की ओपीडी में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोहिया संस्थान में बिना कोविड के किसी भी मरीज का इलाज नहीं किया जाएगा। ओपीडी की नई व्यवस्था से मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा।

स्वास्थ्य विभाग कर रहा हीलाहवाली!

वहीं राजधानी लखनऊ के बड़े सरकारी अस्पतालों में भी अव्यवस्था सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का दंश कोरोना के मरीज भुगत रहे हैं। केजीएमयू, लोहिया अस्पताल और पीजीआई ने अपनी बेड क्षमता नहीं बढ़ाई है।

एल-2 अस्पतालों के मरीज एल-3 अस्पताल में भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। कई बड़े संस्थानों में कोरोना महामारी को लेकर लापरवाही और मनमानी देखने को मिल रही है।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी को लेकर सरकारी संस्थानों में 780 बेट किए जाने का आदेश पारित किया गया है। कोरोना को लेकर सरकारी अस्पतालों की ये लापरवाही कोरोना के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती है।

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