लालजी टंडन ने यूपी में दो बार बनवाई बसपा की सरकार
लालजी टंडन ने यूपी में दो बार बनवाई बसपा की सरकार

लखनऊ। सभासद से लेकर विधायक सांसद मंत्री व राज्यपाल रहे स्व.लालजी टंडन का वैचारिक विरोधियों से भी निकट का सम्पर्क रहता था। सबको साथ लेकर चलने की कला भी उनमें थी। उत्तर प्रदेश में भाजपा बसपा गठबंधन के सूत्रधार भी टंडन जी ही रहे। बसपा प्रमुख मायावती को एक नहीं बल्कि दो बार मुख्यमंत्री बनवाने में लालजी टंडन की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

गेस्ट हाउस कांड के बाद जब मुलायम सरकार का पतन हुआ उसके बाद भाजपा के सहयोग से मायावती पहली बार मुख्यमंत्री बनी थी। मायावती को भाजपा का सहयोग दिलाने में लालजी टंडन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गेस्ट हाउस कांड के समय जब मायावती पर हमला हुआ था तो उस समय लालजी टंडन ने ही मायावती को बचाया था। इसी कारण बसपा प्रमुख मायावती लालजी टंडन को अपना भाई मानती थी। मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी मायावती लालजी टंडन को राखी बांधने उनके आवास जाया करती थी।
इसके बाद 2002 के विधानसभा चुनाव के बाद जब प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा बनी और किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा। इसके बाद लालजी टंडन ने भाजपा के सहयोग मायावती को मुख्यमंत्री बनवाने में मदद की। उत्तर प्रदेश में भाजपा को सत्ता के शिखर पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही यही कारण था कि भाजपा के महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी सहमती अवश्य ली जाती थी।

लखनवी संस्कृति में रचे बसे थे टंडन
लालजी टंडन लखनऊ की संस्कृति में रचे बसे थे। लखनऊ में होली के जुलूस,कवि सम्मेलन,रामलीला के आयोजन हों या हजरतगंज के काफी हाउस अथवा राजा ठंडाई की दुकान पर होने वाली बहसें टंडन जी की हर जगह भागीदारी रहती थी। लखनऊ के रीति रिवाज,खान पान एवं लोक व्यवहार की उनको गहराई से जानकारी थी।

सभी धर्मों में थी उनकी स्वीकार्यता
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय चौधरी  ने बताया कि लालजी टंडन की सभी धर्मों में स्वीकार्यता थी। सब लोग उन्हें बाबू जी कहते थे। लखनऊ में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी से उनके निकट के संबंध थे। धर्म जाति पक्ष विपक्ष से परे लखनऊ के जन जन से उनका लगाव था। यही कारण रहा है कि पुराने लखनऊ में भी भाजपा को जबर्दस्त वोट मिलते थे।

 

ऑनलाइन शॉपिंग सेल के हक में 72% ग्राहक, नहीं चाहते डिस्काउंट सेल पर लगे बैन

Previous article

लखनऊ की पौराणिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड से आहत थे लालजी टंडन

Next article

You may also like

Comments

Comments are closed.

More in featured