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मध्य प्रदेश में बारिश ने खोली सरकार के दावों की पोल, सपना पूरा होने की आस में लोग

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मध्य प्रदेश के आगर मालवा में इस बार आई आफत की बारिश ने मानो सरकार की विकास की वो सारी पोले खोल दी , जिसमे राज्य की शिवराज व केंद्र की मोदी सरकार यह कह रही है कि विकास तो 70 साल के बाद भाजपा सरकार के नेतृत्व में हो रहा है । उदहारण के तौर पर इस गांव की ये तस्वीरें जरा गौर से देख लीजिए ये गांव लगभग पूरा भाजपा समर्थित माना जाता है ।
यंहा जब लोकसभा चुनाव आता है तो यंहा के लोग इस आशा में प्रधानमंत्री मोदी जी को वोट करते है कि आज़ादी के 70 साल बाद शायद मोदी उनके उस सपने को पूरा करदे जिसके लिए वो कई बार चुनावो के लिए बहिष्कार करते आ रहे है , ये गांव है आज़ाद भारत के मध्यप्रदेश में स्थित आगर जिले के बडौद तहसील का जिसका नाम बरखेड़ा है , इस गांव के लोग लंबे समय से उस जरूरी मांग सरकार के सामने रखते आ रहे है कि जब तेज बारिश होती है तो उनका सीधा सम्पर्क बड़े शहर से टूट जाता है यंहा आज़ादी के 75 साल बाद भी रोड़ व पुलिया नही होने से यंहा के लोग बारिश में अपने गांव व घर से बाहर नही जा सकते हैं।

09 09 2019 mp bhopal rain 19560961 मध्य प्रदेश में बारिश ने खोली सरकार के दावों की पोल, सपना पूरा होने की आस में लोग

जंहा पूरा मध्यप्रदेश आज़ादी के 75 साल बाद बड़े जोर शोर से आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। उस मौके पर इस गांव के लोग आजादी के 75 साल बाद भी अपने आप को आज़ाद भारत का हिस्सा मानने पर अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है। ग्रामीणों की माने तो यंहा कई बार उन्होंने चुनावो का बहिष्कार भी किया ।जंहा बाद में बड़े अधिकारियों के आश्वासन पर उन्होंने सरकार का साथ भी दिया। इसके साथ बड़े अधिकारी जिसमे कलेक्टर , जिला पंचायत सीईओ , सांसद विधायक और मुख्यमंत्री को अपने गांव की सड़क बनवाने के लिए आवेदन सौंप चुके है। लेकिन उनकी सुनवाई किसी भी जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने अभी तक नही की ।

यंहा ग्रामीणों का कहना है कि जब तेज बारिश होती है तो ग्रामीण गांव से बाहर नही निकल पाते। कई बार गर्भवती महिलाओं और किसी के बीमार होने पर उन्हें बड़ी समस्याओं का सामान करना पड़ता है। यंहा स्कूल जाने वाले बच्चों की तो यह स्थिति है कि जब तेज बारिश होती है तो उन्हें सरकार ने अघोषित छुट्टी का फायदा उठाना पड़ता है। बरहाल आज़ादी के अम्रत महोत्सव में डूबी सरकार के नामुइन्दे को ये सुध भी जरूर लेनी चाहिए । जंहा ग्रामीण आज भी अपने आप को आज़ादी का हिस्सा ना मानने पर मजबूर है । बरहाल सरकार और सरकार के अधिकारी कब सुध लेंगे ये तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन विकास के दावे को हांकती ये बाते सब निरंक साबित होते हुवे दिखाई दे रही है।

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