हक जदतगमा फर्जी आईडी बनाकर अवैध खनन को देते थे अंजाम, पुलिस ने धरदबोचा

देहरादून: हर चीज में कुछ नफा होता है और कुछ नुकसान. इसी तरह से इंटरनेट के भी अगर अनेकों फायदे हैं तो कई नुकसान भी हैं. जहां इंटरनेट से हमें सुविधा मिलती है, वहीं ये अपराध और धोखाधड़ी का भी एक माध्यम बन गया है. जिसे साइबर क्राइम कहते हैं. अपराधी साइबर क्राइम को अंजाम देने के लिए नए-नए तरीके आजमा रहे हैं, जिसे आम लोगों के लिये भांपना बेहद मुश्किल हो गया है.

ताजा मामला देहरादून का है. एसटीएफ देहरादून को बड़ी सफलता मिली है. टीम ने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के ई-रवन्ना पोर्टल पर फर्जी आईडी बनाकर अवैध खनन मामले का पर्दाफाश किया है और तीन खनन माफियाओं को गिरफ्तार किया है. जानकारी के मुताबिक पकड़े गए माफिया फर्जी आईडी के माध्यम से खनन के लिए ई-रवन्ना जारी कर 25 हजार टन अवैध खनन कर सरकार को लाखों रुपये रॉयल्टी का चूना लगा चुके है.

भूतत्व एंव खनिकर्म विभाग की नोडल रश्मि प्रधान ने बताया कि एक अवैध खनन का मामला प्रकाश में आया है. जिसमें विभाग की ई-रवन्ना पोर्टल के माध्यम से एक फर्जी आई.डी. का प्रयोग कर अवैध खनन किया गया है. मामला सामने आते ही फर्जी आईडी को ब्लॉक कर दिया गया है.

जांच में पता चला कि इस आइडी से 26 से 27 मई के बीच 25 हजार टन उपखनिज (रॉयल्टी 37 लाख 84 हजार 200 रुपये) का चुगान कर लिया गया, जबकि ये आइडी खनिज विभाग के रिकॉर्ड में पाई ही नहीं गई. इससे पहले मार्च में भी विक्रम सिंह की आइडी से 72 हजार रुपये की रॉयल्टी वाला 20 टन उपखनिज भी उठाया गया.
इस आई.डी. से एक सेल पर्चेस आर्डर सतीश लोधी के नाम का निकाला गया है जिससे की अवैध खनन का कार्य करने का अपराध स्पष्ट होता है. जांच के बाद बीते दिन तीन आरोपियों के गिरफ्तार किया गया.

आरोपियों से बरामद फोन में मुकदमा उपरोक्त से सम्बन्धित फर्जी आईडी एवं अन्य संदिग्ध आईडियो का विवरण भी मिला है. साथ ही अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिली हैं. जिसके सम्बन्ध में जांच जारी है.

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