amit shah
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कर्नाटक आगामी चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। इसी प्रक्रिया में राज्य की मौजूदा सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायत और वीरशैव समुदाय को अलग धर्म और अल्पसंख्यक का दर्जा दिलाने वादा किया था लेकिन कांग्रेस के इस प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी मिलना मुश्किल है। मंगलवार को यहां चुनावी रैली के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने भाषण में साफ कर दिया कि लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा सरकार नहीं देने वाली है।

 

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उन्होंने ने कहा कि लिंगायत समुदाय के सभी महंतों का यह कहना है कि समुदाय को बंटने नहीं देना है। मैं इस बात का भरोसा दिलाता हूं कि ऐसा नहीं होगा। जब तक बीजेपी की सरकार है किसी भी तरह का बंटवारा नहीं होगा। हम इसको लेकर प्रतिबद्ध है।

 

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने की राज्य सरकार की सिफारिश को केंद्र सरकार नहीं मानेगी। वहीं, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने के सुझाव को सिद्धारमैया सरकार की मंजूरी पर कहा कि यह येदियुरप्पा जी को कर्नाटक का सीएम बनने से रोकने की रणनीति है। वे लिंगायत वोटों का धुव्रीकरण चाहते हैं, लेकिन समुदाय इसे लेकर जागरुक है। चुनाव के बाद बीजेपी अपना रुख स्पष्ट करेगी।

 

इस दौरान अमित शाह ने कांग्रेस को भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया। आपको बता दें कि मंगलवार यानि अपनी यात्रा के पहले दिन उन्होंने लिंगायत मठों का दौरा किया साथ ही चित्रदुर्ग में करीब 43 मिनट तक प्रभावशाली दलित मठ शरना मधरा गुरु पीठ के महंत मधरा चेन्नैया स्‍वामीजी से मुलाकात की थी।

 

आपको बता दें कि लिंगायत समुदाय लिंगायत मत भारतवर्ष के प्राचीनतम सनातन हिन्दू धर्म का एक हिस्सा है। इस मत के ज्यादातर अनुयायी दक्षिण भारत में हैं। यह मत भगवान शिव की स्तुति आराधना पर आधारित है।लिंगायत सम्प्रदाय भगवान शिव जो कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश, चराचर जगत के उत्पत्ति के कारक हैं उनकी स्तुति आराधना करता है। आप अन्य शब्दों में इन्हें शैव संप्रदाय को मानने वाले अनुयायी कह सकते हैं। इस सम्प्रदाय की स्थापना 12वीं शताब्दी में महात्मा बसवण्णां ने की थी। इस मत के उपासक लिंगायत कहलाते हैं। यह शब्द कन्नड़ शब्द लिंगवंत से व्युत्पन्न है। यद्यपि वीरशैव देश के अन्य भागों – महाराष्ट्र, आंध्र, तमिल क्षेत्र आदि – में भी पाए जाते हैं किंतु उनकी सबसे अधिक संख्या कर्नाटक में पाई जाती है।

 

1980 में लिंगायत समुदाय ने राज्य में जनता दल के नेता रामकृष्ण हेगड़े पर भरोसा जताया था। बाद में इस समुदाय ने कांग्रेस के वीरेंद्र पाटिल के साथ थाम लिया। 1989 चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद पाटिल  को मुख्यमंत्री चुना गया, लेकिन राजीव गांधी ने उन्हें इस पद से हटा दिया था। इसके बाद लिंगायत फिर से हेगड़े के सपोर्ट में आ गए। 2004 में हेगड़े के निधन के बाद लिंगायतों ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को अपना नेता चुना। जब भाजपा ने 2011 में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाया तो इस समुदाय ने बीजेपी से भी दूरी बना ली थी।

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