इस जूते से मजबूत होगी भारतीय सेना, बॉर्डर पर रोकेगा दुश्‍मनों की घुसपैठ

शैलेंद्र सिंह, लखनऊ: भारतीय सेना बॉर्डर पर घुसपैठियों को रोकने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करती है। लेकिन, अगर सेना के जवानों को आंतकी घुसपैठियों की आहट 20 किलोमीटर तक पहले ही पता चल जाए, तो दुश्‍मनों के मनसूबों को नेस्‍तोनाबूत करने में और आसानी हो जाएगी। और ऐसा संभव होगा ‘जूतों’ से।

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जी हां, वाराणसी के युवा वैज्ञानिक और अशोका इंस्टीट्यूट के रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंचार्ज श्याम चौरसिया ने भारत खबर के पत्रकार शैलेंद्र सिंह से खास बातचीत में बताया कि उनके मन में देश के लिए कुछ करने की जिज्ञासा बचपन से ही है और इसी सोच को लेकर उन्‍होंने भारतीय जवानों के लिए बनाया है- ‘इंटेलिजेंस शूज।’

इस जूते की खासियत

इंटेलिजेंस शूज की खासियत बताते हुए श्याम चौरसिया कहते हैं, ‘देश में घुसने के लिए आतंकी घुसपैठिये बॉर्डर पर चुपचाप चोरी-चोरी प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बॉर्डर पर आतंकी घुसपैठ को रोकने और जवानों को पीछे से हुए आंतकी हमले से बचाने के लिए मैंने इंटेलिजेंस जूता बनाया है। यह जूता बॉर्डर पर घुसपैठ होने व अपने क्षेत्र में दुश्मन के प्रवेश करते ही एक से 20 किलोमीटर दूर से अलार्म व वाइब्रेट करके सैनिकों को अलर्ट कर देते हैं। इससे समय रहते ही जवान अपनी और बॉर्डर की सुरक्षा करते हुए दुश्‍मनों की घुसपैठ को नाकाम कर सकते हैं।’

कैसे काम करेगा इंटेलिजेंस जूता?

श्‍याम चौरसिया बताते हैं कि, ‘यह इंटेलिजेंस शूज घुसपैठियों की हर प्रकार की गतिविधि पर नजर रखता है। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी और मोबाइल नेटवर्क पर कार्य करता है। इसका लेजर और ह्यूमन सेंसर देश के बॉर्डर पर रखा होगा और इसका रिसीवर जूते में लगा होगा। बॉर्डर पर जैसे ही दुश्‍मन की कोई हरकत होगी और वह सेंसर की रेंज में आएगा। सेंसर एक्टिव होकर कुछ ही सेकेंड में जूते पर सिग्‍नल भेजेगा और जूते में लगा अलार्म जवान को सूचित कर देगा कि कोई घुसपैठिया बॉर्डर में दाखिल हुआ है। ऐसे में जवान सर्तक हो जाएंगे और समय रहते उसे रोकने में सक्षम हो सकते हैं।’

 

 

जूते से कर सकते हैं दुश्‍मन पर फायर

उन्‍होंने बताया कि, ‘आपात समय में जवान अपनी सुरक्षा करते हुए इस जूते से दुश्‍मन पर फायर भी कर सकते हैं। इसके लिए जूते में दो फोल्डिंग 9mm के गन बैरल लगाए गए हैं। रिमोट के माध्‍यम से जूता आगे और पीछे दोनों तरफ से गोलियां दाग सकता है। इस डिवाइस के प्रयोग से बॉर्डर और जवान दोनों की सुरक्षा करने में आसानी होगी।’

 

 

ठंड में जवानों के पैरों को रखेगा गर्म

युवा वैज्ञानिक चौरसिया बताते हैं, ‘इस जूते में एक विशेष प्रकार का हीटर लगाया है, जो ठंड के मौसम में जवानों को पैरों को गर्म रखेगा। महज 650 ग्राम वजन का यह जूता रबड़ और स्‍टील की प्‍लेट को मिलाकर तैयार किया गया है। जूते में सोलर चार्जिंग सिस्‍टम लगाया गया है। इस जूते को बनाने के लिए स्टील की चादर, एलईडी लाइट, पांच वोल्‍ट वाली सोलर प्लेट, रेडियो सर्किट, स्विचेस, इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर और वाइब्रेशन मोटर का इस्तेमाल किया है। करीब डेढ़ साल में तैयार किए गए इस जूते को बनाने में करीब 30 हजार रुपए का खर्च आया।’

फंड की वजह से दब जाती है प्रतिभा

इस जूते को लेकर भविष्‍य की प्‍लानिंग पर श्याम चौरसिया ने कहा कि, ‘मेरी इच्‍छा है इस जूते का इस्‍तेमाल भारतीय सेना के जवान करें, लेकिन पर्याप्‍त आर्थिक मदद न मिल पाने के कारण हम इस तकनीक को और मजबूती नहीं दे पा रहे हैं। स्‍टार्टअप इंडिया की शुरुआत तो स्टार्टअप्स और नए विचारों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए हुई थी लेकिन धरातल पर काम नहीं हो पा रहा है। इससे न सिर्फ मेरी बल्कि हमारे जैसे कई युवा प्रतिभाशालियों की प्रतिभा पर्याप्‍त आर्थिक मदद न मिल पाने के कारण दब जाती है। मैंने कई नए-नए इनोवेशन किए हैं और इस जूते के लिए प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री कार्यालय को मेल के जरिए पत्र भेजकर आर्थिक मदद की मांग भी की, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। अब मैं कोरियर के माध्‍यम से पत्र भेजने की तैयारी कर रहा हूं।’

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