चारधाम यात्रा और हवाई सेवाओं को लेकर ये है खेल

देहरादून। देवभूमि में होने वाली चारधाम यात्रा की शुरूआत हो गई है। बीते 18 तारीख को गंगोत्री यमुनोत्री के कपाट खुले। जिसके बाद अब सूबे में चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है। पर्यटन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी पूरी है। लेकिन नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से अभी तक यात्रा को लेकर हवाई सेवाओं के बिषय में सौ दिन चले ढाई कोस जैसी स्थिति बनी हुई है।

गौरतलब हो कि हवाई सेवाओं को लेकर नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से निविदा आमंत्रित की गई थी। आपको बतातें चले कि बीते 17 तारीख को निविदा खुलनी थी लेकिन विभाग ने ये कह कर निविदा निरस्त कर दी कि हर रूटों पर केवल एकल निविदा आई थी । नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा इस मामले में 7वीं बार निविदा निरस्त कर दी गई है। जबकि अब यात्रा सुचारू रूप से आरम्भ होने में 10 दिनों से कम समय बाकी बचा है। अब विभाग ने 24 तारीख तक नई निविदा जमा करने को कहा है। अब 28 और 29 को केदारनाथ, बद्रीनाथ के कपाट खुलने हैं। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि निविदा को समय पर निपटना जो कि हालत देखते समझ से परे हैं।

बता दें कि चारधाम यात्रा की हवाई सेवाओं को लेकर कई बार गंभीर आरोपों को कई सरकारों ने झेला है। लेकिन हर साल हवाई सेवाओं सवालों के घेरे में ही उड़ान भरती है। सूत्रों की माने तो इस प्रकरण में टिकटों की बिक्री से लेकर निविदा होना तक के लिए एक बड़ा खेल होता है। जिसमें करोड़ों की बिरात होती है। कई कंपनियों को लाभ कराने के लिए सरकारी तंत्र उन्ही की दिशा में चलना भी शुरू कर देता है।

वहीं मौजूदा हालातों को देखते हुए ये साफ नजर आ रहा है। कि अगर निविदा में कोई कंपनियां नहीं आती हैं, क्योंकि यात्रा का समय शुरू हो गया है। तो सरकार क्या इस बार हवाई सेवाओं को प्रदान करने के लिए क्या विकल्प सोचेगी। क्योंकि विभाग ने बताया कि निविदा में कई बीते सालों की अपेक्षा संसोधन किया गया था। जिसके चलते कई कंपनियां निविदा में आने से वंचित हो गई थीं। 2 या 3 आपरेटरों को एक एक रूट पर एक ही निविदा आई। जिससे प्रक्रिया निरस्त हुई। कहीं ये कोई बड़ा खेल तो नहीं था। सरकार की आंखों में धूल झोंकने का जिससे सरकार को वैल्पिक व्यवस्था की ओर सोचना पड़े और चहेती कंपनियों के नामों को आगे कर उन्होने इस साल की निविदा ना होने या पूरी ना होने की स्थिति में लाभ कराया जाए। क्योंकि मामला एक दो करोड़ का नहीं बल्कि करोड़ों का है।

क्योंकि बीते साल जहां 23 लाख पर्यटकों ने चारधाम यात्रा की है। वहीं इसमें तकरीबन 1लाख से ज्यादा हवाई सेवाएं प्राप्त किए हुए हैं। ऐसे में एक बात साफ है जहां इस बार पर्यटकों की संख्या में इजाफा होना तय है। वहीं इस बार पहले निविदा को लेकर खेल शुरू हो गया। इसके बाद टिकटों की बिक्री को लेकर जीएमवीएन को देने की बात आई। लेकिन वो भी 1 जून से इसके पहले टिकटों की बिक्री की पूर्ववत व्यवस्था की बात थी। लेकिन अभी जब निविदा की प्रक्रिया निरस्त हो गई और पुन निविदा आमंत्रित की गई है तो साफ है कि अब खुल्ला खेल होगा चारधाम हवाई यात्रा को लेकर ऐसे में सरकार और प्राईवेट विमानन कंपनियों के बीच कौन कौन साझेदारी करेगा ये जानना बड़ा ही दिलचस्प होगा।

 अजस्र पीयूष शुक्ला