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कोरोना की दूसरी लहर ने देश में हाहाकार मचा दिया है। हर तरफ इसके मामले देखने को मिल रहें हैं। सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहें हैं ताकि कोरोना की चेन को तोड़ा जा सके। लेकिन एसबीआई रिसर्च की लेटेस्ट रिपोर्ट ने सबको हैरानी में डाल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में कोरोना की दूसरी लहर अब से 20 दिन बाद यानी मई महीने के बीच में पीक पर पहुंचेगी और तब तक देश में कोरोना के एक्टिव मामले 36 लाख के आसपास पहुंच जाएंगे।

आपको बता दें कि पिछले एक हफ्ते से देश में रोजाना कोरोना के 3 लाख से अधिक नए मामले आ रहे हैं। जो काफी डराने वाले है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक इस महामारी का सबसे बुरा दौर मई के तीसरे हफ्ते में खत्म हो चुका होगा। रिपोर्ट के अनुसार वैक्सीनेशन के लिए क्लस्टर बेस्ड अप्रोच ही एकमात्र रास्ता है।

कोरोना की दूसरी लहर ने मचाया कोहराम

देश में जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है तब से देश में कोहराम मचा रखा है। कोरोना मरीजों की संख्या रोजाना नए रिकार्ड बना रही है। हालांकि एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक मई महीने में कोरोना मरीजों की संख्या कई रिकार्ड तोड़गी।

कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट

दूसरे देशों की तुलना में भारत में कोरोना की दूसरी लहर तब पीक पर होगी जब रिकवरी रेट 77.8 फीसदी होगा। एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट ‘The Power of Vaccination’में कहा है कि रिकवरी रेट में एक फीसदी की कमी 4.5 दिन में हो रही है। यानी इसमें करीब 20 दिन लगेंगे। गौरतलब है कि रिकवरी रेट में 1 फीसदी कमी से एक्टिव मामले 1.85 लाख बढ़ जाते हैं।

देश में बुरा दौर आना बाकी

भारत में कोरोना केस के पॉजिटिविटी रेट 20.5 फीसदी हो गया है। जो दुनिया में सबसे कम में से एक है। साथ ही देश में रिकवरी रेट भी 82.5 फीसदी रह गया है। पिछले एक हफ्ते से देश में रोजाना कोरोना के 3 लाख से अधिक नए मामले आ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को दूसरी लहर के पीक पर पहुंचने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे व्यापक स्तर पर संक्रमण का खतरा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर उसी दौरान पीक पर होगी जब यह पूरे देश में चरम पर पहुंचेगी। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि इसका सबसे बुरा दौर मई के तीसरे हफ्ते में खत्म हो चुका होगा।

चुनावी रैलियों से फैला ज्यादा कोरोना !

एक तरफ जहां देश में कोरोना की दूसरी लहर अपने पैर पसार रही थी। तो वहीं दूसरी तरफ देश में चुनावी रैलियां भी की जा रही थी। जिसके कारण कोरोना को बढ़ावा देने के लिए चुनावी रैलियों को भी जिम्मवार माना जा रहा है।
हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमण के ज्यादा मामले महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में सामने आ रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में हुई कुल मौतों में 50 साल से कम आयु के लोगों की संख्या 13.6 फीसदी है। इससे साबित होता है कि यह वायरस उन लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है। जिन लोगों को अभी तक वैक्सीन नहीं लगी है।

वैक्सीन की कीमत पर उठ रहे सवाल

देश में जब वैक्सीन बनी भी नहीं थी तक से इसकी कीमत को लेकर सवाल उठना षुरू हो गए थे। हर कोई अपने अपने दाम बताए जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार दो फैक्टर वैक्सीन की कीमत तय करेंगे। जिसमें पहला है वॉल्यूम ऑफ प्रॉडक्शन। इसमें वैक्सीन प्रॉडक्शन की अधिकांश लागत फिक्स है। छोटे बैच की तुलना में बड़े बैच तैयार करना सस्ता पड़ता है। दूसरा फैक्टर है प्रॉडक्ट लाइफसाइकल। जब कोई प्रॉडक्ट नया होता है तो उसकी कीमत ज्यादा होती है ताकि रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा प्रॉडक्शन फैसिलिटीज में किए गए निवेश का भुगतान करने के साथ-साथ प्रॉफिट भी कमाना होता है।

कीमतों में अंतर से विदेशी वैक्सीन मैन्युफैक्चरर्स को भी भारत आने का मोह होगा। फाइजर जैसी कंपनियों ने इसके संकेत दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैक्सीनेशन के लिए क्लस्टर बेस्ड अप्रोच ही एकमात्र रास्ता है। भारत जैसे देश में जहां हर राज्य, हर शहर की डेमोग्राफी अलग है, वहां एक डिसेंट्रेलाइज्ड अप्रोच ही सबसे अधिक तर्कसंगत लगती है। जिससे इस वायरस को रोका जा सके।

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