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नहीं रहे हिंदी साहित्य में नई जान डालने वाले प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण….

kunwar narayan नहीं रहे हिंदी साहित्य में नई जान डालने वाले प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण....

नोएडा। हिंदी के प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। फैजाबाद के रहने वाले नारायण लगातार 51 सालों से साहित्य से जुड़े थे। नारायाण ने नोएडा के अपने घर में अंतिम सास ली। उनके परिवार में उनकी पत्नि, बेटा और बहु है। मिली जानकारी के मुताबिक कुवंर पिछले काफी वक्त से बीमार चल रहे थे। कुवंर नारायण की मत्यू पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मैं उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में जन्मे साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ से सम्मानित कुंवर नारायण की मृत्यु पर शोक व्यक्त करता हूं। उनका हिंदी साहित्या को दिया योगदान अविस्मरणीय है। kunwar narayan नहीं रहे हिंदी साहित्य में नई जान डालने वाले प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण....

नारायण की रचनाओं की बात करें तो उन्होंने चक्रव्यूह, परिवेश, हम तुम, इन दिनों, कोई दूसरा नहीं, आत्मजयी, वाजश्रव के बहाने और कुमारजीन जैसी अविस्मरणीय कृतियों का वर्णन किया है। उन्होंने अपनी रचनाओं से हिंदी सहित्य में एक नई जान डाली है। नारायण अज्ञेय द्वारा संपादिक तीसरा सप्तक के कवियों में रहे हैं। उनको उनकी कविताओं के लिए कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिल चुके हैं। कुवंर नारायण को उनकी रचनाओं के लिए साल 2009 मोें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। इसी के साथ उन्हें साल 2005 में ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला था। इसके अलावा कुमार आशान सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार और व्यास पुरस्कारों से भी सम्मानित हैं।

लखनऊ यूनिवर्सिटी से उन्होंने अंग्रेजी साहित्य से परास्नातक की पढ़ाई की थी। हालांकि, पढ़ाई के तुरंत बाद उन्होंने पुश्तैनी ऑटोमोबाइल बिजनेस में काम करना शुरू कर दिया था। बाद में आचार्य कृपलानी, आचार्य नरेंद्र देव और सत्यजीत रे से प्रभावित होकर साहित्य में उनकी गहरी रुचि हो गई। आधुनिक समय के तनावों-दबावों के बीच यह कविता बड़ी सहजता से प्रेम और सहिष्णुता का एक पाठ बनाती रही। इसके अलावा उन्होंने कई पौराणिक आख्यनों को आधुनिक और समकालीन अर्थों और संदर्भों के साथ पुनर्परिभाषित भी किया। आत्मजयी, वाजश्रवा के बहाने जैसी रचनाएं इस सामर्थ्य का प्रमाण हैं।

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