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योगिनी एकादशी: इस व्रत के पीछे क्या है मान्यता, जानिए कैसे करें पूजन

योगिनी एकादशी: इस व्रत के पीछे क्या है मान्यता, जानिए कैसे करें पूजन

लखनऊ: हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में योगिनी एकादशी पड़ती है। इस दौरान सभी व्रत रखते हैं और भगवान का पूजन अर्चन करते हैं। इस वर्ष 5 जुलाई रविवार के दिन यह पवित्र व्रत किया जाएगा। इस दौरान शुभ मुहूर्त 4 जुलाई रात 7:55 से 5 जुलाई रात 10:30 तक होगा।

पौराणिक मान्यता

योगिनी एकादशी मनाने के पीछे एक पौराणिक मान्यता है, जिसके अनुसार योगिनी एकादशी व्रत भी भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौर को चतुर्मास कहा जाता है। चतुर्मास में किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते, ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। योगिनी व्रत रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और सबकी मनोकामना पूरी होती है।

कैसे करें पूजा

योगिनी एकादशी के दिन पूरी श्रद्धा और भाव के साथ व्रत रखा जाता है। इस दिन सभी भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु का पूजन अर्चन करते हैं। यह व्रत दशमी तिथि से आरंभ होकर द्वादशी तिथि तक रहता है। इस दौरान एकादशी को अन्न नहीं ग्रहण किया जाता। शास्त्र कहता है कि योगिनी एकादशी के दिन भोग में सात्विक भोजन का इस्तेमाल करना चाहिए। इस दिन चावल खाने से बचना चाहिए।

एक वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं, सभी का अपना अलग महत्व है। ऐसा माना जाता है कि योगिनी एकादशी का व्रत 88000 ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बराबर फल कारी होता है। इस व्रत को रखने से कई बीमारियां और संकट दूर हो जाते हैं।

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