पाकिस्तान में आम चुनाव, हिंदुओं को लुभाने में लगे राजनीतिक दल

इस्लामाबाद। जिस तरह से भारत में आम चुनाव या फिर विधानसभा के चुनाव से पहले हमारे कुछ राजनीतिक दल भारत के सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग इस्लाम को लुभाने के लिए लग जाते हैं। ठीक उसी तरह पाकिस्तान में भी वहां के सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग हिंदू को लुभाने के लिए वहां की राजनीतिक पार्टियों ने भी अपनी कमर कस ली हैष बता दें कि पाकिस्तान में जून-जुलाई में आम चुनाव होने वाले हैं, जिसके बाद पाक के राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है।

इसी कड़ी में हिंदु और अन्य अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 15 जनवरी 2017 को पंजाब के चकवात में स्थित प्राचिन श्री कटासराज मंदिर के अमरुकुंड पर आर.ओ फिल्टर का उद्घाटन किया था। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिया था कि श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास 32 कमरों वाले यात्री निवास स्थान का निर्माण समय से पहले पूरा किया जाए। इसके अलावा सिंध में हिंदू नेताओं के साथ दिवाली मनाने पहुंचे शरीफ ने होली पर पिचकारी और गुलाल से वातावरण के हर्षित होने का संदेश दिया था।

बता दें कि लगभग 21 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान में हिंदुओं की जनसंख्या 80 लाख बताई जाती है। इनमें 93 प्रतिशत से अधिक सिंध प्रांत में बसे हुए हैं। बंटवारे के कारण सबसे ज्यादा पलायन पश्चिमी पंजाब से हुआ। इस प्रदेश में हिंदू जनसंख्या 4.76 प्रतिशत है। फिर भी अब पाकिस्तान में इस्लाम के बाद सर्वाधिक हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। पूरी दुनिया में हिंदू जनसंख्या के हवाले से पाकिस्तान का 5वां स्थान है।

वहीं दूसरी तरफ सिंध में बसे हिंदुओं को अपने साथ जोडने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी ने फरवरी में अहम कदम उठाते हुए थारपरकर की सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा कुमारी कोहली को सीनेट की प्रथम हिंदू दलित महिला के रूप में सामान्य क्षेत्र से विजयी बनवाकर इतिहास रचा है। अब इसी क्षेत्र में जनप्रतिनिधि डा. रमेश वंकवाणी को मुस्लिम लीग (नवाज) से अलग करते हुए नामवर क्रिकेट कप्तान रहे इमरान खान ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी में शामिल कर लिया है।

इसके अलावा पाकिस्तान हिन्दू कौंसिल के सलाहकार डा. रमेश ने सिद्दीक-उल-फारुख को वक्फ बोर्ड अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का विरोध किया था। सर्वोच्च न्यायालय में अमरकुंड प्रकरण की सुनवाई के दौरान इसकी पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि बोर्ड का अध्यक्ष अल्पसंख्यक समुदाय में से ही होना चाहिए। ये मुद्दा पार्टी नेतृत्व के समक्ष कई बार उठाया लेकिन किसी ने कान नहीं धरा। समझा जाता है कि सिंधी हिन्दू नेता डा. रमेश के शामिल होने से इमरान खान के नेतृत्व वाली पार्टी पी.टी.आई. सिंध में पांव पसार सकती है।

इमरान का कहना है कि कायदे आजम जिन्ना साहब ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पाकिस्तान बनाया। अब हमारा भी नैतिक दायित्व है कि यहां बसे अल्पसंख्यकों को समान अधिकार प्राप्त हों और सुरक्षा भी। इमरान की पार्टी का दबदबा मुख्यत: खैबर पख्तूनख्वा प्रदेश में माना जाता है। अभी 2 माह पूर्व इमरान ने मेरे पैतृक शहर पाकपट्टन में वट्टू परिवार की शादीशुदा बेटी बुशरा से तीसरा निकाह किया। वह पीरों के खानदान से सम्बद्ध है। उसे लोग बुशरा दीदी व पिंकी पीर के नाम से जानते हैं।