August 10, 2022 10:38 pm
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10 सितंबर से शुरू होगी गणेश चतुर्थी की धूम, जान लीजिए कैसे करनी है पूजा  

10 सितंबर से शुरू होगी गणेश चतुर्थी की धूम, जान लीजिए कैसे करनी है पूजा  

लखनऊ: आने वाले 10 सितंबर से देश के कई हिस्सों में गणपति की धूम शुरू होने जा रही है। पूरे वर्ष भक्त इस अवसर का इंतजार करते रहते हैं। इस बार गणपति महोत्सव 10 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर तक जारी रहेगा। सारे भक्त अपने जीवन में खुशहाली और समृद्धि की कामना इन पवित्र दिनों में करते रहेंगे।

इस बार गणेश चतुर्थी पर “चित्रा नक्षत्र” में ब्रह्म योग का अति शुभ योग बन रहा है। बालाजी ज्योतिष संस्थान बरेली के ज्योतिषाचार्य पं. राजीव शर्मा के अनुसार, 10 सितंबर को चतुर्थी तिथि सूर्योदय से रात्रि 9:58 बजे तक, चित्रा नक्षत्र मध्यान्ह 12:57 बजे तक, ब्रह्म योग सायं 5:41 बजे तक और ऐन्द्र योग पूर्ण रात्रि रहेगा। इसके बाद वृश्चिक लग्न पूर्वाह्न 11:12 बजे से अपराह्न 1:31 बजे तक, भद्रा पूर्वाह्न 11:18 बजे से रात्रि 09:57 बजे तक रहेगा। (गणेश जी का जन्म क्योंकि भद्रा काल में हुआ था, इसलिए भद्रा काल का दोष नहीं मान्य है।)

पं. राजीव शर्मा ने बताया कि, 10 सिंतबर को भाद्र पद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी “गणेश चतुर्थी” का “ब्रह्म” में आना अति शुभ है। यह योग शुभ फल देने वाला, सूर्य स्वामित्व वाला, लक्ष्मी प्रदायक, उद्योग-व्यापार के लिए श्रेष्ठ है। इस योग में श्री गणेश जी की पूजा, वन्दना, साधना एवं व्रत से विद्या, बुद्धि, सम्पदा, रिद्धी-सिद्धि की प्राप्ति एवं सभी विघ्न बाधाओं का नाश होता है।

उन्‍होंने बताया, गजानन को प्रसन्न करने के लिए सिद्धि विनायक व्रत भी रखा जाता है, जो भाद्र शुक्ल चतुर्थी को होता है। मध्यान्ह काल में जन्म लेने वाले गणेश जी का व्रत इसलिए मध्यान्ह व्यापनी चतुर्थी को करने से लाभ मिलता है। इस दिन रात्रि में चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगता है। वहीं, गणेश जी का पूजन निम्न प्रकार षोडाषोपचार विधि से करना चाहिए।

पूजन सामग्री

केसर, कुमकुम, अवीर, सिंदूर, गुलाल, पुष्प, चौसरे, चावल, ग्याराह सुपारियां, पंचमेवा, पंचामृत, गंगाजल, धूप बत्‍ती, बिल्व पत्र, दीप, लौंग, नैवेद्य लड्डू पांच गुड़ प्रसाद, लाल कपड़ा एक हाथ, बरक, इलायची, कलश, नारियल, सफेद कपड़ा एक हाथ, पुष्पहार, डंठल सहित पान, इत्र, सरसों, जनेऊ, बताशा, आंवला और मिश्री।

पूजन विधि
  • एक चौकी पर लाल रेशमी वस्त्र बिछाकर उसमें धातु, मिट्टी, सोने अथवा चांदी की प्रतिमा ध्यान आवाह्न के बाद स्‍थापित करें।
  • गणेश जी पर “ऊं गं गणपतये नम:” का उच्‍चारण करते हुए पूजन सामग्री चढ़ाएं।
  • इसके बाद सिंदूर में हल्का सा घी मिलाकर एक पान के पत्ते पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। इसके मध्य में पूरी तरह से कलावा में लपेटकर सुपारी रख दें।
  • अब इसे गणेशजी मानकर साथ में मिट्टी की भी प्रतिमा रखकर पूजा शुरू करें।
  • गजानन महाराज के लिए प्रसाद रूप में मोतीचूर का लड्डू (5 या 21) जरूर चढ़ाएं।
  • इसके अलावा लड्डू के साथ गेहूं का परवल भी चढ़ाएं।
  • फिर गन्ने के टुकड़े, धान का लावा, नारियल, सत्तू, तिल एवं केले का भोग लगाएं।
  • इस विधान के अंत में हवन सामग्री को देशी घी में मिला लें और उसी से हवन करें। गजानन की प्रतिमा के विसर्जन का विधान करना भी उत्तम माना गया है।
अति विशेष
  • गण‍पति महाराज की पूजा सायं काल में की जानी चाहिए।
  • पूजा के बाद नजरें नीची रखते हुए चन्द्रमा को अर्ध्य दें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
  • घर में तीन गणेशजी की पूजा करने से बचना चाहिए।
  • गलती से चंद्र दर्शन होने पर मुक्ति के लिए “हरिवंश भागवतोक्त स्यमन्तक मणि के आख्यान” का पाठ करना चाहिए।

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