पिता और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बात कतई नहीं मानूंगा: तेजप्रताप यादव

नई दिल्ली। बिहार के सबसे बड़े सियासी घर में पारिवारिक मामला अब सार्वजनिक हो गया है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के सबसे बड़े बेटे तेजप्रताप यादव (तेज प्रताप यादव) ने अपनी शादी के 6 महीने के भीतर ही पत्नी ऐश्वर्या से तलाक की अर्जी दी है। महज 6 महीने के भीतर ही पत्नी से तलाक करने की अर्जी देने वाले राजद नेता तेजप्रताप यादव ने स्पष्ट कह दिया है कि वह अपने अपने पिता और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बात कतई नहीं मानने वाले हैं। तेजप्रताप यादव ने कहा कि मेरे मां-बाप, भाई-बहन सबने मुझे नकार दिया, सब ऐश्वर्या के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि मेरे साथ मेरे परिवार का कोई नहीं खड़ा है। सब ऐश्वर्या के साथ हैं। हालांकि, वह अपना इरादा नहीं बदलेंगे।

तेजप्रताप यादव अपना इरादा नहीं बदल लेंगे

बता दें कि ऐसी उम्मीद थी कि अपने पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात के बाद शायद तेजप्रताप यादव अपना इरादा बदल लेंगे, मगर अभी ऐसा होता नहीं दिख रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि तेजप्रताप यादव का पिता लालू यादव के सुलह समझौते की सलाह नहीं मानने के पीछे ये तर्क है कि उन्होंने कभी भी तेजप्रताप की बात नहीं मानी है। जो वह उनकी बात मान ले। पूरे परिवार के राजनीतिक नुक़सान के बारे में पूछे जाने पर तेजप्रताप यादव का कहना था कि ये क्या होता है? उन्हें जो नुक़सान हो रहा है उसका क्या? तेज़ प्रताप ने कहा कि उन्होंने अपनी अधिकांश बातें कोर्ट में दायर याचिका में कही हैं और ज़रूरत आने पर वो और कोर्ट के सामने तथ्य रखेंगे।

कोर्ट में दायर याचिका के बिंदुओं को लेकर चर्चा का बाज़ार गर्म है

इस बीच कोर्ट में दायर याचिका के बिंदुओं को लेकर चर्चा का बाज़ार गर्म है। अधिकांश लोगों का कहना है कि इस याचिका में अधिकांश बिंदु तेजप्रताप यादव की मानसिक स्थिति को दर्शाता है। लेकिन उनके रुख से साफ़ है कि वो सुलह-समझौते के मूड में नहीं हैं। हालांकि उनके तमाम आरोपों के बावजूद उनकी पत्नी ऐश्वर्या या उनके ससुर चंद्रिका राय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हैं। क्योंकि सबको लग रहा हैं कि इससे परिवार की और बदनामी होगी। राजद नेता तेज प्रताप यादव ने बीते शनिवार को रांची स्थित एक अस्पताल में अपने पिता लालू प्रसाद से मुलाकात की और कहा कि वह ऐश्वर्या राय के साथ अपनी छह महीने पुरानी शादी समाप्त करने के अपने निर्णय पर कायम हैं क्योंकि वह ‘घुट-घुटकर नहीं जी सकते।