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Good news: बीएड प्रवेश परीक्षा के आवेदन की बढ़ी तारीख, अब 24 मार्च तक भर सकेंगे फॉर्म

Good news: बीएड प्रवेश परीक्षा के आवेदन की बढ़ी तारीख, अब 24 मार्च भर सकेंगे फॉर्म

लखनऊ: बीएड की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। बीएड प्रवेश परीक्षा 2021 के आवेदन की अंतिम तिथि अब 24 मार्च कर दी गई है। पहले ये तिथि 15 मार्च निर्धारित की गई थी।

इसी के साथ जो छात्र-छात्राएं 24 मार्च तक भी किन्ही कारणों से बीएड की प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे, उनके लिए 31 मार्च तक अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। इसके लिए अभ्यर्थियों से विलंब शुल्क लिया जाएगा।

18 फरवरी को जारी हुआ था विज्ञापन

बता दें कि लखनऊ विश्वविद्यालय ने 18 फरवरी को बीएड की प्रवेश के लिए विज्ञापन जारी किया था। प्रवेश परीक्षा में आवेदन के लिए अंतिम तिथि 15 मार्च निर्धारित की गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीएड में प्रवेश चाहने वाले विद्यार्थियों को राहत देते हुए आवेदन करने की तिथि बढ़ा दी है।

जनरल कैंडीडेट के लिए 1500 रुपये फीस निर्धारित

इस परीक्षा में आवेदन के लिए जनरल छात्र को 1500 रुपये जबकि अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए 750 रुपये फीस निर्धारित की है। वहीं विलंब से आवेदन करने पर जनरल और ओबीसी छात्र को 2000 रुपये जबकि एससी-एसटी छात्र को 1000 रुपये जमा करने पड़ेंगे।

यानि जनरल और ओबीसी छात्र को 500 रुपये अतिरिक्त लेट फीस देनी होगी, वहीं एससी-एसटी छात्र को 250 रुपये अतिरिक्त लेट फीस जमा करनी होगी।

लखनऊ और अवध यूनिवर्सिटी करवाते हैं आयोजन

बता दें कि लखनऊ विश्वविद्यालय और राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी फैजाबाद बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन करवाते हैं। यूपी बीएड 2021 प्रवेश परीक्षा के माध्यम से 2900 कॉलेजों में एडमिशन मिलेगा। इन कालेजों में बीएड के लिए करीब 2.40 सीटें निर्धारित की गई हैं।

बीएड करने से क्या होता है फायदा

विभिन्न कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के लिए बीएड का काफी क्रेज रहता है। आप सोच रहे होंगे की आखिर बीएड में ऐसा क्या है, जो विद्यार्थी इसके लिए लाइन लगाए रहते हैं। दरअसल, भारत में शिक्षा के महत्व को समझते हुए टीचर बनने के लिए एक विशेष डिग्री हासिल करनी पड़ती है, इसी डिग्री को बीएड कहते हैं।

अगर आप सरकारी स्कूल में टीचर बनना चाहते हैं, तब भी आपको ये डिग्री हासिल करनी होगी। इसके बिना आप सरकारी टीचर नहीं बन सकते हैं। इसके अतिरिक्त सरकार ने भी अब ये घोषणा की है कि चाहे सरकारी शिक्षक हों या प्राइवेट स्कूल के टीचर, उन्हें बीएड की डिग्री के बिना शिक्षक की नौकरी नहीं दी जाएगी। इससे अब बीएड का महत्व और भी बढ़ गया है। बता दें कि बीएड दो साल का एक स्नातक कोर्स है।

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