गुरु प्रदोष-ऐसे करे पूजा दूर होगा कष्ट

नई दिल्ली। भग्वान शिव को लेकर अनेकों कहानियां प्रचलित हैं। ऐसी ही एक कहानी हैं  गुरु प्रदोष पर्व के नाम से हैं जो शिव के लिए प्रचलित है। जिसमे ऐसा माना जाता हैं कि परमेश्वर शिव को समर्पित त्रयोदशी तिथि सभी दोषों का नाश करती है अतः इसे प्रदोष कहते हैं। इसमे ंशिव आपके सारें दुख को दूर करते हैं।

भविष्य पुराण के अनुसार त्रयोदशी के स्वामी कामदेव हैं व इसके अमृत कला का पान कुबेर करते हैं। शास्त्रनुसार इस दिन समस्त दिव्यात्माएं अपने सूक्ष्म स्वरूप में शिवलिंग में समा जाती हैं। इस दिन प्रदोषकाल में शिवलिंग के दर्शन मात्र से सर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं व बिल्वपत्र चढ़ाकर दीप जलाने से अनेक पुण्य प्राप्त होते हैं।

गुरु प्रदोष की प्रचलित कहानी

इस दिन को लेकर कहानी प्रचलित हैं जिसके अनुसार एक बार इंद्र व वृत्रासुर की सेना में हुए युद्ध में देवताओं ने दैत्यों को हरा  डाला था। यह देख  गुस्साएं वृत्रासुर राक्षस से विकराल रूप धारणकर स्वयं युद्ध में कूद पड़ा। सभी भयभीत देवता बृहस्पति की शरण में गए। बृहस्पति ने वृत्रासुर परिचय देते हुए कहा की तपस्वी वृत्रासुर ने गंध-मादन पर्वत पर घोर तप कर शिव को प्रसन्न किया है। पूर्वजन्म में भी वह शिवभक्त चित्ररथ नामक राजा था। एक बार जब वह कैलाश महादेव के दर्शन हेतु गया तो उसने महादेव के वाम अंग में बैठी पार्वती को देखकर उनका उपहास कर दिया जिस से पार्वती ने क्रोधित होकर चित्ररथ को दैत्य स्वरूप धारण करने का श्राप दे दिया। श्राप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हो त्वष्टा ऋषि के तप से उत्पन्न हो वृत्रासुर बना। अतः हे इन्द्र! तुम गुरु प्रदोष व्रत कर महादेव को प्रसन्न करो। इंद्र ने आज्ञा मानकर गुरु प्रदोष का पालन किया व वृत्रासुर पर विजय प्राप्त की। गुरु प्रदोष के व्रत, पूजन व उपाय से शत्रुओं का अंत होता है, दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है व परिजनो के कष्टों का निवारण होता है।

कैसे करे पूजा

शिवालय जाकर शिवलिंग का विधिवत पूजन करें। पीतल के दिपक में गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, बिल्वपत्र चढ़ाएं, पीपल का पत्ता चढ़ाएं, पीत चंदन से त्रिपुंड बनाएं, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं, केले चढ़ाएं तथा रुद्राक्ष माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें।

कब करें पूजा
शाम 18:35 से शाम 19:35 तक।

क्या हैं मंत्र
वृं वृत्ता-वृत्त-कराय नमः शिवाय वृं॥

क्या करें उपाय
मुक्ति पाने के लिए शिवलिंग पर केसर मिले जल से अभिषेक करें।

परिवार के दुखों को दूर करने के लिए  शिवलिंग पर चढ़ा नींबू घर के गेट पर बांधें।

टोटका

शत्रु दमन हेतु शत्रु का नाम लेते हुए शिवलिंग के समक्ष पीली सरसों कर्पूर से जलाएं।

तो अगर आप इस पूजा को बताएं गए विधी विधान के जरिए करेगें तो आप देखेंगें कि आपका दुख दूर हो जाएगा।