सीएम ने बदला फैसला, अब नहीं बंद होगा बठिंडा थर्मल पावर प्लांट

चंडीगढ़। बठिंडा में बने गुरुनानक थर्मल पावर प्लांट को बंद करने के फैसले से सरकार पीछे हट गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस प्लांट को बंद नहीं किया जाएगा। बता दें कि पहले इस प्लांट को बंद किया जा रहा था, क्योंकि ये प्लांट ज्यादा बिजली उत्पादन के लिए योग्य नहीं है। इसको लेकर पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि राज्य में अब बिजली की खपत कम है और अन्य संसाधनों से इन प्लांटों की तुलना में सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध हो रही है इसलिए इनको न चलाने का सरकार का फैसला सही है। सीएम ने कहा कि थर्मल प्लांट बंद होने से किसी भी कर्मचारी के रोजगार का कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि कर्मचारियों को नजदीक के कामगारों में सेवा देने के लिए भेजा जाएगा।

सीएम ने कहा कि इससे उत्पादन बढ़ेगा क्योंकि इससे बिजली पैदा करने के लिए पड़ती अधिक लागत पर रोक लगेगी और पंजाब राज्य बिजली निगम को बचत होगी। उन्होंने कहा कि धान के सीजन और धान के अलावा के सीजन में पंजाब में बिजली की मांग में बहुत फर्क होता है क्योंकि इस साल गर्मी में अधिकतमन बिजली की खपकत 11,600 मेगावॉट थी और सर्दी में ये मांग 5600 मेगावॉट रिकॉर्ड की गई थी। उन्होंने कहा कि चाहे पंजाब अतिरिक्त बिजली वाला सूबा बन गया है, लेकिन इसके बिजली उत्पादन के सामथ्र्य का पूरा प्रयोग सिर्फ धान के सीजन के दौरान 4 महीनें में ही होता है, जबकि बाकी के आठ महीने में उत्पादन के सामथ्र्य से कम बिजली उपभोग होती है। 

 

उन्‍हाेंने  कहा कि बठिंडा थर्मल प्लांट में लगी, पुरानी तकनीक के कारण इसमें बिजली की पैदावार के लिए दूसरे थर्मल प्लांटों की अपेक्षा कोयले का अधिक उपभोग होता है। वर्ष 2016-17 दौरान बठिंडा थर्मल प्लांट में बिजली की पैदावार के लिए प्रति यूनिट 3102 किलो कैलोरी रिकॉर्ड की गई, जबकि गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट, लहरा मोहब्बत में 2675, गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट, रोपड़ में 3100, नाभा पावर लिमिटेड में 2268, तलवंडी साबो पावर लिमिटेड में 2400 और जीवीके में 2550 किलो कैलोरी प्रति यूनिट की खपत रिकॉर्ड हुई।

कैप्टन ने कहा कि यह प्लांट पुराने समय का है। नए थर्मल प्लांटों के मुकाबले इस थर्मल प्लांट को चलाने के लिए अधिक मुलाजिमों की जरूरत है। नए थर्मल प्लांटों के काम का पूरी तरह कंप्यूटरीकरण किया हुआ है। इस समय नए प्लांट अधिक सामथ्र्य के यूनिटों जैसे कि 660 मेगावॉट और 800 मेगावॉट के साथ स्थापित किए जा रहे हैं। बठिंडा थर्मल प्लांट का अधिक प्रयोग नहीं हुआ और वर्ष 2015-16 में 22.73 फीसद और वर्ष 2016-17 में 17.74 फीसद के प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) पर चलाया गया। उन्‍होंने कहा कि प्लांट लोड फैक्टर कम होने की वजह से वर्ष 2016-17 के लिए बिजली की पैदावार 9.31 रुपये प्रति यूनिट की ऊंची कीमत पर की गई।