मेरठ में राष्ट्रोदय का आयोजन, भागवत बोले कट्टर हिंदुत्व का अर्थ उदारता

मेरठ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उत्तर प्रदेश के मेरठ मे रविवार को संघ कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें संघ के लगभग 4 लाख कार्यकर्ताओं ने एक साथ शिरकत की। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत दोपहर तीन बजे यहां पहुंचे और अपने भाषण की शुरुआत की। उनके इस भाषण को लाइव देश और विदेश में सुना गया, जिसके लिए मीडिया के साथ-साथ खुद संघ ने भी पूरी तैयारी की थी। संघ प्रमुख के भाषण के लाइव प्रसारण को लेकर उत्तर प्रदेश संघ के प्रमुख अजय मित्तल ने बताया की लाइन प्रसारण के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रोदय कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संघ के लाखों कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सृष्टि के रंग अलग-अलग हैं, लेकिन उनका रूप एक ही है। उन्होंने कहा कि हम वसुधैव कुटुम्बकम का मंत्र लेकर चलने वाले लोग हैं।

संघ प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के उत्थान के लिए और उसके विकास के लिए हर समुदाय के लोगों को स्वयंसेवक बनना होगा। कट्टर हिन्दुत्व का अर्थ समझाते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि कट्टर सत्य निष्ठा और कट्टर अहिंसा का पालन करने को कहते हैं और हिंदू धर्म में कट्टरता उदारता के लिए है। हमारे देश में पूजा करने वाले और नहीं करने वाले लोग, कई भाषाओं को बोलने वाले लोग और हजारों जातियों में खुद को गिनने वाले लोगों का एक ही धर्म है। पूरी दुनिया को समय-समय पर धर्म देने वाला हमारा ही देश है और हम हिंदू हैं इसलिए हम एक हैं, लेकिन दुनिया मानती है कि एक होने के लिए एक सा होना पड़ेगा।

भागवत ने कहा कि हमारा देश एक हैं क्योंकि हमारे यहां वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र पर लोग चलते हैं। हम हिन्दू कट्टर होंगे तो अधिक विविधताओं को समाहित करेंगे। भारत माता को अपनी माता मानने वाला हिन्दू है और हमारे देश में हिन्दू लोग हैं लेकिन वो जानते नहीं कि वो हिन्दू हैं। 1 लाख 70 हजार से ज्यादा स्वयं सेवक सेवा कार्य कर रहे हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि जब कभी- भी देश पर संकट आता है तो स्वयं सेवक वहां पहुंचते हैं और प्राणों की चिंता किए बगैर राष्ट्र के लिए अपना जीवन दांव पर लगा देते है। हम कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन करने के लिए नहीं करते, क्योंकि शक्ति होती है तो उसे दिखाने की जरूरत नहीं होती। संपूर्ण समाज को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ना पड़ेगा, तभी समाज का उत्थान हो पाएगा।