बाबा साहब ने कहा था कि स्वयं में सुधार लाना मानव का धर्म है, जानें उनके प्रमुख संदेश एक क्लिक पर

बाबा साहब ने कहा था कि स्वयं में सुधार लाना मानव का धर्म है, जानें उनके प्रमुख संदेश एक क्लिक पर
  • भारत खबर संवाददाता

मेरठ। संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। अंबेडकर को बाबा साहेब के नाम से भी जाना जाता है। भारत के संविधान निर्माता और आजाद भारत के पहले कानून मंत्री होने का श्रेय भी उन्हें जाता है। उन्होंने दलितों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया और महिला अधिकारों का समर्थन किया। 1990 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। आइए जानते हैं बाबा साहेब के जीवन से जुड़ी इन 5 अहम घटनाओं के बारे में

  1. बाबा साहेब ने 1956 में अपना लिया था बौद्ध धर्म। उनके साथ ही लाखों दलितों ने भी बौद्ध धर्म अपना लिया था। उनका मानना था कि मानव जाति का लक्ष्य खुद में सतत सुधार लाना है।
  2. डॉ. अंबेडकर की पहली पत्नी का नाम रमाबाई, जिनसे उनकी शादी महज 9 साल की उम्र में हुई थी। रमाबाई की मृत्यु के बाद उन्होंने सविता से दूसरा विवाह किया था। सविता अंबेडकर ने भी उनके साथ बौद्ध धर्म अपना या था। सविता का निधन 2003 में हुआ।
  3. डॉ. अंबेडकर को 29 अगस्त 1947 को संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। उनकी अध्यक्षता में 2 साल 11 महीने और 18 दिन के बाद संविधान बनकर तैयार हुआ।
  4. 1951 में संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने के बाद देश के पहले कानूनी मंत्री के पद से अंबेडकर ने इस्तीफा दे दिया। इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता की बात कही गई थी।
  5. बाबा साहेब 9 भाषाओं के जानकार थे और इन्हें देश विदेश के कई विश्वविद्यालयों से पीएचडी की कई मानद उपाधियां मिली थीं। इनके पास तकरीबन 32 डिग्रियां थीं।