taliban अफगानिस्तान: सुरक्षाबलों ने तालिबान से 3 जिले वापिस छीने, भारत से मांगी मदद ?

अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों में तालिबान के साथ सुरक्षाबलों का संघर्ष जारी है। इस बीच अफगान सुरक्षाबलों ने 3 जिलों पर फिर से कब्जा कर लिया है।

जिलों पर देश का झंडा लहराया

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों ने बामियान में सेघन और कहमर्द जिलों और निमरोज में चखनसुर पर फिर से कब्जा कर लिया है। बमियान के राज्यपाल ने कहा कि एक अभियान में सुरक्षाबलों ने कुछ ही देर में जिलों पर फिर से कब्जा कर लिया, और जिलों पर देश का झंडा लहरा दिया।

सुरक्षा बलों का अभियान जारी

वहीं रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा दुश्मन के प्रभाव वाले जिलों पर फिर से कब्जा करने के लिए अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों का अभियान जारी है। उधर तालिबान ने दावा किया है कि उसके लड़ाके उत्तर में जॉवजान प्रांत के केंद्र शेवनर्ग में प्रवेश कर चुके हैं। तो स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने तालिबान को पीछे धकेल दिया है।

‘कुछ लड़ाइयां जीत जाना युद्ध जीत जाना नहीं’

इस बीच अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इंटरव्यू में कई बातें कही, जो तालिबान के साथ चल रहे उसके युद्ध और भारत-अफगान संबन्धों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अशरफ गनी ने कहा कि तालिबान ने अफगान में चल रही लड़ाई में कई जगहों पर जीत हासिल की है। उन्होंने कहा है ये पहली बात ये कि कुछ लड़ाइयां जीत जाना युद्ध जीत जाना नहीं होता।

स्थिति को संतुलित करने की जरूरत

उन्होने कहा कि हमें स्थिति को संतुलित करने की जरूरत है। लेकिन हमारा गोल सैन्य रूप से युद्ध जीतना नहीं है बल्कि अफगानिस्तान में एक राजनीतिक समाधान तक पहुंचना है। भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की मौत पर उन्होंने कहा कि मैं भारतीय पत्रकार के परिवार, और सभी पत्रकारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना देना चाहता हूं।

अशरफ गनी ने कहा कि अफगानिस्तान ने भारत से मिलिट्री सपोर्ट नहीं मांगी है। भारत अफगान का एक असाधारण दोस्त रहा है, मेरे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे रिश्ते हैं। भारत एक ऐसा देश है जिसके साथ हमारे व्यापार का सकारात्मक संतुलन है। हम चौथी औद्योगिक क्रांति से जो बदलाव आने वाले हैं, उसमें भारत के साथ भागीदार बनना चाहते हैं।

प्रतिनिधिमंडलों ने नए दौर की बातचीत शुरू

अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते हमले के बीच अफगान सरकार और तालिबान के प्रतिनिधिमंडलों ने नए दौर की बातचीत शुरू की। दोहा में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुलह के लिए उच्च परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि शांति बहाली करने के लिए दोनों पक्षों से सहमति की आवश्यकता है।

वहीं पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपने दक्षिणी क्रॉसिंग को आंशिक रूप से फिर से खोल दिया। एक अधिकारी ने बताया कि हमने सीमा खोल दी है, पूरी तरह मानवीय आधार पर अपने परिवारों के साथ ईद-उल-अधा मनाने के लिए महिलाओं और बच्चों सहित चार हजार आफगानों की भीड़ को अफगानिस्तान जाने की इजाजत दी गई है।

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