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स्टार्टअप किस चिड़िया का नाम है, कैसे लगते हैं विचारों को पंख? जानिए एक्सपर्ट से

स्टार्टअप किस चिड़िया का नाम है, कैसे लगते हैं विचारों को पंख? जानिए एक्सपर्ट से

लखनऊ: स्टार्टअप जैसे विषय पर विस्तृत जानकारी न होना, कई बार भविष्य को भी खतरे में डाल देता है। स्टार्टअप क्या है? कैसे स्टार्टअप शुरू किया जाए? किन बातों का हम ध्यान रखें? इसी विषय पर उत्तर प्रदेश सरकार में स्टार्टअप सलाहकार रहे प्रणव द्विवेदी से Bharatkhabar.com  ने विशेष बातचीत की। इस बातचीत के दौरान सबसे पहले प्रणव द्विवेदी ने बताया कि स्टार्टअप शुरू करने से पहले एक इनोवेटिव आइडिया की जरूरत होती है।

फंडिंग के पीछे न भागें

विचार सबसे पहले आपके दिमाग में स्पष्ट होना चाहिए। इसके बाद इसी को बिजनेस के रूप में आकार देने का काम किया जाता है। स्टार्टअप में फंडिंग से ज्यादा कई अन्य पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर आपका आईडिया अच्छा है तो फंडिंग भी आपको बहुत सारे माध्यमों से मिल जाती है। आजकल के युवाओं की सोच पर बात करते हुए प्रणव द्विवेदी ने कहा कि बच्चे आजकल स्टार्टअप शुरू करने से पहले फंडिंग और भविष्य को लेकर परेशान हो जाते हैं। जबकि यह ऐसा विषय है जो एक समय के बाद आपके लिए आसान हो जाता है।

स्टार्टअप में सबसे जरूरी बात है कि आप हारने से कभी घबराए नहीं। उन्होंने कई बड़े वैज्ञानिकों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई सारे प्रयोग किए जाते हैं। हजारों सैकड़ों प्रयोगों में असफल होने के बाद सफलता मिलती है, लेकिन यह सफलता उन सभी प्रयासों के बाद ही पाई जा सकती है। जितनी ज्यादा बार असफल होंगे, सफलता उतनी ज्यादा बड़ी होगी।

कोरोना में मिला आत्मनिर्भरता का मंत्र

इसके साथ साथ विशेष बातचीत के दौरान प्रणव द्विवेदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार भी स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाती है। जिनमें लोगों को अपना आइडिया पेटेंट करवाने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग, मार्केटिंग स्ट्रेटजी और अन्य जरूरी पहलुओं पर मदद सरकार की तरफ से सीधे मिलती है। इसके लिए सही जानकारी का होना बहुत आवश्यक है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि प्रदेश में अब स्टार्टअप को लेकर दिलचस्पी बढ़ने लगी है। विशेषकर कोरोना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से स्थिति इस पूरे महामारी के दौरान बिगड़ गई, ऐसे में देश आत्मनिर्भरता की तरफ भी बढ़ने लगा। आत्मनिर्भरता के मामले में कोरोना संक्रमण का दौर सकारात्मक तरीके से प्रभावी रहा है।

स्टार्टअप किस चिड़िया का नाम है, कैसे लगते हैं विचारों को पंख? जानिए एक्सपर्ट से

जहां एक तरफ हमने स्वदेशी चीजों को बनाने और इस्तेमाल करने पर जोर दिया। वहीं दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था और व्यवसाय को भी मजबूती देने का काम किया। इसी का परिणाम है कि आने वाले दिनों में युवा अलग-अलग विचारों के साथ अपनी स्टार्टअप को नई ऊंचाइयों को लेकर जाएगा। बातचीत के दौरान द्विवेदी ने कहा कि इस क्षेत्र में चुनौतियां कई सारी हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि कौन इन चुनौतियों से खुद को बाहर निकाल पाता है!

स्टार्टअप का असली मतलब

आज के आधुनिक युग में स्टार्टअप का मतलब सिर्फ कंप्यूटर कोडिंग और डिजिटल जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट की जानकारी होना अच्छी बात है। यह आपके व्यवसाय को और मजबूती देने का काम करता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर आप इंटरनेट नहीं जानते तो आप स्टार्टअप नहीं कर सकते। स्टार्टअप के लिए इंटरनेट और अन्य चीजों से ज्यादा जरूरी है, इनोवेटिव आइडिया। आपका आईडिया जितना अलग होगा, उतना ही आप अपने बिजनेस को आगे बढ़ा पाएंगे।

मजबूत टीम के साथ स्टार्टअप की उड़ान

सलाहकार के तौर पर प्रणव द्विवेदी ने बताया कि लोग फंडिंग के पीछे भागने लगते हैं, लेकिन एक बार फंडिंग मिल जाने के बाद उस पैसे का कैसे सदुपयोग करना है? कैसे अपने आईडिया को एक बड़े बिजनेस के रूप में तब्दील करना है? यह नहीं सोच पाते। यहीं से स्टार्टअप पतन की ओर जाने लगता है। जहां एक मजबूत और अनोखे विचार की जरूरत होती है, वहीं दूसरी तरफ एक अच्छी टीम भी स्टार्टअप को मजबूत आधार देने का काम करती है। अगर आपके पास अच्छे लोग हैं तो आपका विचार एक बड़े बिजनेस में आसानी से तब्दील हो सकता है।

आखिर में उन्होंने कहा कि अब स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ ओडीओपी जैसा प्रयोग स्टार्टअप को मजबूती देने का काम कर रहा है। प्रदेश और केंद्र दोनों सरकार स्टार्टअप जैसे प्रयासों को ना सिर्फ आर्थिक रूप से, बल्कि अन्य पहलुओं में भी मदद करने के लिए आगे आ रही है। इससे युवाओं को बेहतर भविष्य और आर्थिक मजबूती दोनों मिलती है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश में स्टार्टअप का एक बहुत बड़ा माहौल बनेगा। यहीं देश को विश्व गुरु बनाने में भी सहायक साबित होगा।

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