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फतेहपुर में खनन ठेकेदार का दबदबा, खबर पढ़कर आपके भी उड़ जाएंगे होश

फतेहपुर में खनन ठेकेदार का दबदबा, खबर पढ़कर आपके भी उड़ जाएंगे होश

फतेहपुर: तमाम सरकारी विभागों में काम करने वाले अधिकारी भले ही समय से अपने काम को अंजाम देते हों, लेकिन लोक निर्माण विभाग खंड दो इसके उलट है। यहां के अधिशाषी अधिकारी वेतन तो सरकारी लेते हैं, लेकिन काम खनन ठेकेदारों के आदेश पर करते हैं। यह हम कह नहीं रहे बल्कि अधिकारी खुद इसे सिद्ध कर रहे हैं।

दरअसल, विभाग की जिस साढ़े सात किलोमीटर की सड़क पर खनन माफियाओं ने कब्जा किया है, उस पर अधिशाषी अधिकारी की पूरी सहमति रही है। तभी तो वह मामले पर पिछले छह महीने से खनन ठेकेदार को एक नोटिस भी नहीं भेज सके। किसी विभाग को आगे या पीछे ले जाने में मुखिया की बड़ी जिम्मेदारी होती है, लेकिन जब मुखिया ही लापरवाही दिखाए तो भला उसे कौन बचाए।

लोक निर्माण विभाग दो की सड़क का मामला  

यह मामला है लोक निर्माण विभाग दो की सड़क का। यह मार्ग असोथर नगर पंचायत से राम नगर कौहन ब्रिज तक बना है, जिसकी दूरी लगभग साढ़े सात किलोमीटर है। इस पूरे मार्ग को खनन ठेकेदार ने डेढ़ फिट ऊंची मिट्टी डाल कर खराब कर दिया। अब बारिश में लोग गिरकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। मामले पर जब अधिशाषी अधिकारी भाग दो सुनील दत्त से बात हुई तो उन्होंने बहुत ही हैरानी भरा जवाब दिया।

अधिशाषी अधिकारी ने बताया कि, सड़क खराब होने की जानकारी पिछले छह महीने से उनके संज्ञान में है। साथ ही इसके लिए ठेकेदार ने अनुमति भी नहीं ली। सड़क को खराब करने पर क्षतिपूर्ति मामले पर भी उन्होंने बड़ा दिलचस्प जवाब देते हुए कहा कि, वह ठेकेदार को दो करोड़ का नोटिस भेजेंगे। हालांकि, यह नोटिस शुक्रवार तक नहीं भेजा गया था।

एक साथ दो जगह का प्रभार

लोक निर्माण विभाग दो के अधिशाषी अधिकारी सुनील दत्त के पास फतेहपुर के साथ प्रयागराज का भी चार्ज है। ऐसे में न जाने कितने ऐसे मार्ग होंगे, जहां पर ऐसी ही बात होगी और ये अधिकारी अपने मन की कर रहे हैं। इस तरह तो सड़कें भगवान भरोसे हैं और विभाग का बंटाधार होना तय है।

वेतन हर महीने, लेकिन नोटिस एक भी न भेज पाए

सरकारी खजाने से हर महीने वेतन निकाल कर अपना जीवन चलाने वाले अधिशाषी अधिकारी अपने विभाग के प्रति कितने जिम्मेदार हैं, यह उनका काम बता रहा है। छह महीने से मामले की पूरी जानकारी होने के बाद भी वह संबंधित के खिलाफ एक नोटिस तक न भेज पाए, जबकि इसके जरिए सरकार को क्षतिपूर्ति धनराशि मिलने वाली थी।

क्यों नहीं गयी नोटिस, नहीं मिला जवाब

आज से करीब छह महीने पहले दिसंबर माह से खनन शुरू हो गया था। इसके पहले ही कई ट्रकों के जरिए मिट्टी मिली हुई मौरंग सड़क पर गिराई गयी थी। तब से लेकर आज तक पूरे 180 दिन बीतने के बाद भी अधिशाषी अधिकारी सुनील दत्त एक नोटिस तक न जारी कर पाए। जब उनसे इस बात की देरी का कारण पूछा गया तो वह चुप हो गए, लेकिन सवाल यह है कि क्या चुप होने से उनकी खामी छिप जाएगी?

ऐसे अधिकारी की हो जांच

पूरे मामले पर घोर लापरवाही दिखाने वाले अधिकारी की जांच होनी चाहिए, जिससे पता चल सके कि उन्‍होंने ऐसी लापरवाही क्यों की? क्या वह ठेकेदार के दबाव में काम कर रहे हैं या फिर अपने स्वार्थ में काम कर रहे हैं? यदि ऐसे अधिकारी को मामले की जानकारी न हो तो भी बड़ा सवाल है कि जब उन्हें अपने क्षेत्र के बारे में जानकारी नहीं है तो ऐसे में अधिकारी को वीआरएस ले लेना चाहिए।

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