February 27, 2024 6:45 am
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शिवसेना के जवाब में AIMIM प्रमुख ओवैसी की मांग, घूंघट पर कब लगेगी रोक

owaisi शिवसेना के जवाब में AIMIM प्रमुख ओवैसी की मांग, घूंघट पर कब लगेगी रोक

एजेंसी, नई दिल्ली। देश में बुर्के पर बैन की शिवसेना की मांग पर राजनीति तेज हो गई है। शिवेसना की सहयोगी पार्टी बीजेपी ने भी बुर्के पर बैन की मांग का विरोध किया है तो AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा कि घूंघट पर प्रतिबंध कब लगाओगे.
शिवसेना का सामना हमेशा से पोपट मास्टर रहा है। वह पहले लिखता था कि नरेंद्र मोदी को हराने के लिए अलग से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन उनकी पार्टी अब साथ चुनाव लड़ रही है। बुर्का बैन पर पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़ना चाहिए, यह हर किसी का मौलिक अधिकार है। सामना में जो लिखा गया है वह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। यह पेड न्यूज का एक नया उदाहरण है। – असदुद्दीन ओवैसी, AIMIM प्रमुख
ओवैसी ने घूंघट का जिक्र करते हुए कहा कि वे घूंघट हटाने के बारे में क्या कहेंगे। अगर सुरक्षा को लेकर मामला है तो साध्वी प्रज्ञा और अन्य लोगों ने हमला करने के लिए क्या पहना था। इससे पहले बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने श्रीलंका में ईस्टर संडे पर आतंकवादी हमलों के बाद वहां की सरकार की ओर से बुर्का पर प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी नियम लाने की योजना का हवाला दिया. हमलों में 250 लोगों की मौत हो गई थी।

श्रीलंका हमले के बाद वहां बुर्का पर लगा प्रतिबंध

इससे पहले शिवसेना ने श्रीलंका में आतंकी हमलों के बाद वहां की सरकार की ओर से बुर्का पर प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी नियम लाने की योजना का हवाला देते हुए देश में भी बुर्का पर प्रतिबंध लगाने की मांग की. शिवसेना ने अपने मुखपत्रों ‘सामना’ और ‘दोपहर का सामना’ में आज छपे संपादकीय में कहा, ‘इस प्रतिबंध की अनुशंसा आपातकालीन उपाय के तौर पर की गई है जिससे कि सुरक्षा बलों को किसी को पहचानने में परेशानी ना हो. नकाब या बुर्का पहने हुए लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।’
शिवसेना की इस मांग के साथ ही राजनीति तेज हो गई है. बीजेपी ने भारत में बुर्का पर प्रतिबंध को गैरजरुरी बताया, लेकिन भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ने इस मांग का समर्थन किया है. साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि किसी कारण से अगर कोई इस माध्यम का लाभ उठाते हैं और इससे देश को नुकसान पहुंचता हो, अगर सुरक्षा खतरे में हो तो ऐसी परंपराओं में थोड़ी ढील देनी चाहिए।

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