श्रीरामचरित मानस का 108 बार होगा पाठ, भण्डारे के साथ लगभग चार महीने तक लगातार होगी पूर्णाहुति

श्रीरामचरित मानस का 108 बार होगा पाठ, भण्डारे के साथ लगभग चार महीने तक लगातार होगी पूर्णाहुति
  • संवाददाता, भारत खबर

लखनऊ। आपने अखंड रामायण पाठ के बारे में सुना होगा। 24 घंटे तक चलने वाला यह पाठ सनातन धर्मावलम्बियों के घरों में अक्सर होता रहता है। कहते हैं अखण्ड मानस पाठ करने-कराने का अमोघ फल होता है, बशर्ते पाठ ठीक से किया जाए और पाठ खंडित न होने पाए। यह पाठ कुछ लोग पुण्य लाभ के लिए तो कुछ कुशल-मंगल अथवा अन्य किसी कामना की सिद्धि के लिए करते हैं। लेकिन जनकल्याण के लिए यह पाठ 108 बार हो तो जानकर आपको बड़ी हैरानी होगी। कलिकाल के साक्षात देव यानी हनुमान जी के जन्मोत्सव पर शुरू हो रहे इस पावन यज्ञ में 108 बार मानस पाठ होगा।

इस तरह के अनूठे कार्यक्रम का संकल्प लिया है उन्नाव के निवासी और वरिष्ठ समाजसेवी पवन मिश्र ने। उनके साथ-साथ उनके गुरुदेव यानी राम व्यास जी इस संकल्प को पूर्ण कराने के लिए संकल्पित हैं। कोआपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन पवन मिश्र कहते हैं कि जनमानस के कल्याण के लिए यह महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। इसमें क्षेत्र, जिला और देश-परदेश के सभी अनुयायी शामिल हो सकते हैं। वह कहते हैं कि ब्रह्मेश्वर महादेव और किशुनदेव बाबा की कृपा पाने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन उन्नाव जिले के गोमापुर (चौपाई) में हो रहा है।

रामायण पाठ से घर की व्याधियां दूर होतीं हैं

ब्रम्हर्षि राम व्यास कहते हैं कि भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु का दसवां अवतार माना जाता है। रामायण में प्रभु राम के सभी कार्यों और जीवनचरित्र का सजीव विवरण है, इसी कारण लोग रामायण पढ़ने की सलाह देते हैं। हम अपने जीवन में प्रभु राम जैसे अच्छे कार्य करें और अपने जीवन को सफल बनाएं। वह कहते हैं कि घर में रामायण का पाठ करने से परिस्थितियां बेहतर बनती हैं और कई तरह के स्वास्थ्य फायदे भी होते हैं। कहते हैं कि अखण्ड मानस पाठ गोस्वामीजी के समय में ही होने लगा था।

अखण्ड पाठ के दो तरीके

रामव्यास कहते हैं कि मानस पाठ के दो तरीके शास्त्रों में वर्णित है। एक साधारण पाठ और दूसरा संपुटित पाठ। साधारण पाठ तो साधारण ही होता है इसमें जैसा लिखा है वैसा ही पाठ किया जाता है परंतु दूसरा संपुटित पाठ थोड़ा भिन्न होता है इसमें जो दोहा संख्या के बाद संपुटित दोहा या चौपाई का दो बार पाठ करके आगे पाठ होता है। अखण्ड मानस पाठ कराने के लिए किसी योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण को लाना चाहिए जो आवश्यक पूजा सम्पन्न करा सके और अपने उद्देश्य अथवा कामना के अनुरूप उचित सम्पुट का चयन करके अखण्ड मानस का पाठ आरंभ कराना चाहिए यह सामान्यतः 24 घंटे में पूरा हो जाता है इसके बाद हवन, आरती, भजन और भोजन होना ही चाहिए ।

इस तरह के अनूठे कार्यक्रम का संकल्प लिया है उन्नाव के निवासी और वरिष्ठ समाजसेवी पवन मिश्र ने। उनके साथ-साथ उनके गुरुदेव यानी राम व्यास जी इस संकल्प को पूर्ण कराने के लिए संकल्पित हैं। कोआपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन पवन मिश्र कहते हैं कि जनमानस के कल्याण के लिए यह महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। इसमें क्षेत्र, जिला और देश-परदेश के सभी अनुयायी शामिल हो सकते हैं। वह कहते हैं कि ब्रह्मेश्वर महादेव और किशुनदेव बाबा की कृपा पाने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन उन्नाव जिले के गोमापुर (चौपाई) में हो रहा है।
निमंत्रण पत्र

बिना रुके होना चाहिए अखण्ड रामायण का पाठ

अखण्ड पाठ के दौरान सबसे अधिक जरूरी बात यह है कि जब तक पाठ पूरा न हो, तब तक अनवरत चलना चाहिए। बीच में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। जहां पाठ चल रहा हो वहां कोई अनर्गल बात किसी को नहीं करना चाहिए और न ही पाठ करने वालों को पाठ के अलावा इधर-उधर कुछ बीच में बोलना चाहिए। कई लोग तो ऐसे होते हैं जिन्हें रखे गए सम्पुट का ध्यान ही नहीं रहता ये एक बार कुछ तो दूसरी बार कुछ बोल देते हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए ।

पाठ में ध्यान रखने योग्य बातें-

कहते हैं कि जैसा श्रीरामचरितमानस में लिखा गया है बिल्कुल वैसा ही पढ़ना चाहिए अपने मन से कुछ जोड़ना या घटाना नहीं चाहिए यहां तक रामा, सियारामा आदि भी नहीं । यदि जरूरत होती तो गोस्वामीजी खुद जोड़ देते उनके जैसा भक्त-संत इस कलियुग में पैदा नहीं हुआ है और न होगा इसलिए ज्यादा दिखावा नहीं करना चाहिए।

  • बिल्कुल स्पष्ट और शुद्ध पढ़ना चाहिए होता तो यह कि लोग मनमर्जी कुछ भी जोड़ देते हैं एक जगह तो मैंने सुना कि लोग जय अम्बे गौरी आदि भी जोड़ रहे थे।
  • रंगरूट फ़िल्मी तर्ज पर कहने के लिए भी जोड़ते-घटाते हैं, तोड़-मरोड़ कर कहते हैं। यहां फ़िल्मी तर्ज की कोई जरूरत नहीं है ऐसे लोगों को पहले से ही दूर कर देना चाहिए।
  • एक बार एक लोग कह रहे थे कि हम लोग ऐसे तर्ज पर रामायण कह रहे थे कि लोग झूम गए शहर की लड़कियाँ आई हुई थीं वे तो डांस करने लगीं बड़ा आनंद आया। जब हम ही अपने ग्रन्थों का मजाक बनायेंगे तो दूसरे लोग कैसे सम्मान करेंगे।
  • यह ध्यान रखें कि अखण्ड पाठ खंडित न होने पाए। पाठ बहुत ही स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। इसके लिए पढ़ने वाले बीच-बीच में बदलकर आराम करते रहें। प्रेम व भक्ति भाव से सीधा-सीधा पढ़ना चाहिए, ऐसा करने से अवश्य ही अभीष्ट फल प्राप्त होता है।