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शिवाजी संकुचित मन के नहीं थे : राजनाथ 

Rajnath शिवाजी संकुचित मन के नहीं थे : राजनाथ 

लखनऊ। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यहां कहा कि छत्रपति शिवाजी ने राष्ट्रीय चेतना को नई चेतना दी। उनकी सेना में हिंदू और मुस्लिम दोनों थे। यदि वह संकुचित मन के होते तो मुस्लिम सैनिक न रखते।गृहमंत्री ने शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मुख्य प्रांगण में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा शिवाजी से चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति शिवाजी की गहरी आस्था थी। बच्चों और महिलाओं के प्रति उनका आचरण अनुकरणीय है।

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राजनाथ ने कहा कि हिंदुस्तान एक था, एक है और एक रहेगा। राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म और जाति के आधार पर लोगों को बांटना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “सभी कश्मीरी हमारे भाई हैं और वहां शांति बहाल होनी चाहिए। सभी समस्याओं का समाधान शांति और बातचीत से ही निकल सकता है।” राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि छत्रपति शिवाजी को विश्व के महान योद्धा के रूप में जाना जाता है। उनमें सबको जोड़ने की चुंबकीय शक्ति थी। शिवाजी सुशासन के पक्षधर थे। उन्होंने राष्ट्रहित में कभी परिवार का मोह नहीं किया। जोखिम लेना शिवाजी की विशेषता थी।

राज्यपाल ने छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा बनने वाले शिल्पकार उत्तम पचारणे की सराहना की और कहा, पचारणे द्वारा बनाई गई शिवाजी की प्रतिमा वास्तव में उंगली की कला और हृदय के भाव की जीती जागती मिसाल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब लखनऊ विश्वविद्यालय शताब्दी वर्ष की ओर जा रहा है, ऐसे में शिवाजी की प्रतिमा राष्ट्रभक्ति की सत्त प्रेरणा देती रहेगी। कार्यक्रम में कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय डॉ. एसबी निमसे ने भी अपने विचार रखें।

 

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