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बावनखेड़ी की खलनायिका शबनम की फांसी टली, दया याचिका बनी वजह

शबनम को फांसी का इंतजार

लखनऊ। अमरोहा के बावनखेड़ी हत्याकांड में दोषी करार दी जा चुकी शबनम की फांसी एक बार फिर टल गई है। अमरोहा कोर्ट ने अभियोजन ने शबनम का ब्यौरा मांगा था। मगर उसके वकील ने राज्यपाल को दया याचिका दायर कर दी गई। इस वजह से फांसी की तारीख मुकर्रर नहीं हो सकी है।
शबनम की फांसी का इंतजार
शबनम की फांसी को लेकर मंगलवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई हुई। पहले ही माना जा रहा था कि जिला जज की अदालत में शबनम की रिपोर्ट सौंपी जाएगी और अगर इस रिपोर्ट में कोई याचिका लंबित नहीं पाई गई तो शबनम की फांसी की तारीख तय की जा सकती है। शबनम के वकील ने कुछ दिन पहले ही फिर से दया याचिका के लिए राज्यपाल से गुहार लगाते हुए जिला जेल रामपुर प्रशासन को प्रार्थनापत्र सौंपा था। आज सुनवाई में इसी का जिक्र आया। इसके कारण फांसी की तारीख मुकर्रर नहीं हो सकी।

अपने परिवार के सात लोगों को एक साथ मार डाला था शबनम ने 

शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों को बेरहमी से मार डाला था। जिला अदालत ने दोनों को फंसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी की सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद राष्ट्रपति ने भी उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी। नैनी जेल में बंद उसके प्रेमी सलीम की याचिका पर फैसला होना अभी बाकी है।

बेटे से मिलने पहुंची शबनम ने की थी सीबीआई जांच की मांग 

पिछले हफ्ते अपने 12 साल के बेटे से मिलने पहुंची शबनम ने खुद को निर्दोष बताया और पूरे मामले की जांच कराने की मांगद की। शबनम के बेटे की परवरिश कर रहे उस्मानी सैफी ने बताया कि रामपुर जेल में जब उसने शबनम से पूछा की क्या उसने यह गुनाह किया है तो उसने इनकार कर दिया और सीबीआई जांच की बात कही। शबनम ने बेटे ताज से कहा कि वह उसकी परछाई से भी दूर रहे और पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बने।

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