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रूस-यूक्रेन युद्ध का NATO से कनेक्शन? जानिए NATO के बारे में

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमले के आदेश दे दिए है। इसके बाद से ही रूस और यूक्रेन में जंग शुरू हो चुकी है। हालांकि इसको लेकर तमाम देशों ने आपत्ति जाहिर की है साथ ही रूस की इस कार्यवाही की कड़ी निंदा की है। वहीं इसी बीच नाटो (NATO) के शीर्ष अधिकारियों ने गुरुवार को आपातकालीन बैठक का आवाहन किया। 30 राष्ट्र के सैन्य संगठन में दोनों देशों की सहयोगी देशों से बचाव को लेकर मजबूत तैयारी की है। इसी के साथ नाटो शिखर सम्मेलन की तैयारी चल रही है। 

वही नाटो (NATO) महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और यूरो अंटार्टिका रक्षा के लिए एक गंभीर खतरा भी है इस मुश्किल समय में हम यूक्रेन के लोगों के साथ खड़े हैं नाटो सभी सहयोगियों की रक्षा और बचाव के लिए हर मुमकिन प्रयास करेगा।

नाटो क्या है 

नाटो यानी उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन जो उत्तरी अमेरिका और यूरोप का एक साझा राजनीतिक व सैन्य संगठन है। जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संगठन का सबसे बड़ा मसौदा सोवियत संघ के बढ़ते दायरे को सीमित करना था इसके अलावा अमेरिका ने इसका इस्तेमाल यूरोप में राष्ट्रवादी विचार पनपने को रोकने के लिए किया। यूरोपीय महाद्वीप में राजनीतिक एकता बनी रहे।

हालांकि इससे पहले नाटो की शुरुआत साल 1947 में फ्रांस और ब्रिटेन के बीच हुई डंकिर्क संधि में भी हुई थी। यह संधि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की ओर से हमले होने की आशंका को लेकर की गई थी। और जब 1949 में नाटो की स्थापना है। इसमें 12 संस्थापक देश शामिल थे। जिसमें- अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे, लक्जमबर्ग और पुर्तगाल।

यह संगठन मूल रूप से सुरक्षा नीति पर काम करता है जिसका मकसद है अगर कोई बाहरी देश नाटो संगठन में शामिल देश पर हमला करता है तो बाकी के देश उसके खिलाफ जवाबी कार्यवाही करेंगे और उस देश को सैन्य एवं राजनीतिक तरीके से सुरक्षा प्रदान करेंगे। नाटो घोषणा पत्र में अनुच्छेद 5 में साझा सुरक्षा के बारे में महत्वपूर्ण बात की गई है। “उत्तरी अमेरिका या यूरोप के किसी एक या एक से अधिक सदस्य पर हमला होता है तो माना जाएगा कि यह हमला उन पर हुआ है। साथ ही अगर कोई हथियारबंद हमला होता है तो हर कोई संयुक्त राष्ट्रीय घोषणापत्र के अनुच्छेद 51 के मुताबिक हमला झेल रहे पक्ष अकेले या मिलकर बाकी सदस्यों के साथ सलाह मशवरा करके जरूरत पड़ने पर सैन्य तरीके से उत्तरी अटलांटिक आके क्षेत्र की सुरक्षा करने को लेकर हर संभव कार्यवाही कर सकता है।

 

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