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सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाने की योजना में है विपक्ष, बस चुनाव खत्म होने का इंतजार

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Polls 2018) के पूरा होने में अभी दो चरण शेष हैं, मगर विपक्षी पार्टियों ने अभी से ही सरकार बनाने के लिए एक वैकल्पिक रणनीति तैयार कर ली है. सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद विपक्षी पार्टियां राष्ट्रपति से मिलने की योजना बना रही हैं।

विपक्ष की योजना है कि वह लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद राष्ट्रपति से मिलेगा और उन्हें इस बात के लिए राजी करने की कोशिश करेगा कि अगर खण्डित जनादेश (पूर्ण बहुमत नहीं मिलना) मिलता है तो वे सबसे बड़े दल यानी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करें। केंद्र में बीजेपी की सरकार का विरोध कर रहे 21 राजनीतिक दल एक समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं।

उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद वे वैकल्पिक सरकार के गठन के लिए राष्ट्रपति को विपक्षी पार्टियों के समर्थन की पत्र देने को तैयार रहेंगे। सूत्रों ने कहा कि इस असामान्य कदम का कारण यह सुनिश्चित करना है ताकि राष्ट्रपति चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी किसी पार्टी को (सिंगल लार्जेस्ट पार्टी) को क्षेत्रीय दलों और गठबंधन को तोड़ने या तोड़ने का प्रयास करने का मौका न दें।

यह कदम क्षेत्रीय दलों में फूट पड़ने से रोकने के लिए है. बता दें कि लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य होते हैं, जिनमें बहुमत के लिए 274 सांसदों की जरूरत होती है. 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 282 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया. वहीं, NDA की संयुक्त ताकत लोकसभा में 336 सीटें थीं। साल 1998 में राष्ट्रपति केआर नारायण ने सरकार बनाने से पहले और सदन में विश्वास मत हासिल करने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी को समर्थन पत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा था।

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