2600 करोड़ की एमट्रैक परियोजना से बहुरेंगे, देवभूमि के पशुपालक किसानों के दिन

2600 करोड़ की एमट्रैक परियोजना से बहुरेंगे, देवभूमि के पशुपालक किसानों के दिन

देहरादून। किसानों की आय को बढ़ाने के लिए सूबे में अब पशुपालन विभाग एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर आने वाला है। अब तक किसी राज्य में किसानों के लिए इस तरह का कोई प्रोजेक्ट नहीं लाया गया है। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए सचिव पशुपालन आर. मिनाक्षी सुन्दरम रात-दिन एक किए हुए हैं।

उनका मानना है कि किसानों की आय को बढ़ाने के लिए कृषि के साथ किसानों से जुड़े अन्य धन्धों के जरिए भी इनकी आय को बढ़ाया जा सकता है। सूबे में बड़े पैमाने पर पशुपालन का काम होता है।

अब सचिव पशुपालन आर. मिनाक्षी सुन्दरम की सोच और लगन के साथ पशुपालन मंत्री रेखा आर्य का दिशा निर्देशन साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का मार्ग दर्शन सूबे में पशुपालक किसानों के लिए एक बड़ा वरदान लेकर आने वाला है। जिससे पशुपालकों की आय में बढ़ा इजाफा हो सकता है।

इसको लेकर भारत खबर ने सचिव पशुपालन आर मिनाक्षी सुन्दरम से खास बातचीत की जिसमें कई बड़ी बातें सामने आई, जिससे आने वाले दिनों में पशुपालकों के दिन बहुरने की उम्मीद नजर आई है।

 

 

एमट्रैक के जरिए बदलेगी की पशुपालकों की तकदीर

सूबे में पशुपालकों के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास परिषद के सहयोग से एक बड़ा प्रोजेक्ट लाया जा रहा है। पूरे देश में केवल उत्तराखंड ही एक ऐसा राज्य है, जहां पहली बार ऐसा प्रोजेक्ट आ रहा है। जिसका नाम एमट्रैक रखा गया है। जिसका मतलब मिशन फॉर ट्रांसमिशन ऑफ रूलर एंड एग्री कल्चर सेक्टर थ्रू कॉपरेटिव है।

यह परियोजना 2600 करोड़ की वित्त प्रोषित परियोजना है। जिसको एनसीडीसी द्वारा पोषित किया जाएगा। जिसको तहत विभाग प्रदेश में कॉपरेटिव सोसाइटी बनाएगा। जो कि इस परियोजना के तहत प्रोडेक्शन पॉइंट से लेकर मार्केटिंग पाइंट तक जितने सहयोग की जरूरत है, पशुपालक किसानों की आय को बढ़ाने के लिए वो ये सोसाइटी करेंगी।

पशुपालन के साथ बाई बैक की होगी गारंटी

इसको लेकर एक प्रोजेक्ट का ड्रॉफ्ट विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है। जिसको राष्ट्रीय सहकारी विकास परिषद में भेजा जाएगा। इसमें पशुपालको, उद्यान और कृषि को भी शामिल किया गया है। मुख्य तौर पर पशुपालकों के लिए जैसा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों की संख्या बड़े पैमाने पर भेंड और बकरियों का पालन करती है।

इसके साथ ये दो पशु ऐसे हैं, जिसमें बहुत ज्यादा रखरखाव और पालने पर पशुपालकों को खर्च नहीं करना होता है। इस योजना के तहत विभाग द्वारा बनाई गई सोसाइटी में 10 हजार पशुपालक कृषकों को जोड़ा जाएगा। जिसमें 3 हजार कृषकों का विभाग द्वारा चयन कर लिया गया है। इस कार्य को सोसाइटी के जरिए किया जाएगा।

अधिकांश सोसाइटी का गठन हो चुका है। जिसमें जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक सोसाइटी हैं। ये योजना कॉपेटिव मूड में संचालिक की जानी है। जिसके तहत चुके हुए किसानों को विभाग द्वारा पशु दिए जाएंगे। इसमें सोसाइटी द्वारा पशुओं के पालन और रखरखाव के लिए ट्रेंनिग के साथ इनके इलाज और भोजना की भी व्यवस्था भी है। इसके साथ ही वाई बैक गारंटी भी होगी, जिसमें पशुओं को विभाग ही खरीद लेगा।

सूबे से होगा हाईजीन मीट का उत्पादन

विभाग द्वारा जितने भेड बकरी पालन केन्द्र होंगे और पशु उत्पादन के साथ इनको बढ़ावा देने का काम करेंगे। इसमें किसानों को उन्नत नस्ल के पशु किसानों को सौंपे जाएंगे। इसके साथ ही पशुपालक किसानों से इन पशुओं को बाई बैक करके रखा जाएगा। विभाग द्वारा गढ़वाल और कुमाऊं मण्डल में दो स्लाटर हाऊस तैयार किए जाएंगे ।

इसके जरिए विभाग हाइजिन मीट को उपलब्ध कराएगा। जिसकी सप्लाई की जाएगी, इसके तहत प्राथमिक स्तर, जिला स्तर और राज्य स्तर पर बनाई गई सोसायटी द्वारा ही इनका पोस्टमार्टम कर इसे हाइजीनिक तौर पर प्रमाणित किया जाएगा। जिससे विभाग द्वारा एक ब्रॉण्ड भी प्रदान किया जाएगा। जिसको हिमालयन मीट के तौर पर जाना जाएगा।

इसके लिए हम इस तरह से व्यवस्था कर रहे हैं कि इस मीट का एक अलग बाजार बना जाए। इससे पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी ही इसके साथ कंज्यूमर को भी हाइजीन मीट मिल सकेगा।

पहले चरण में 10 हजार किसान होंगे लाभांवित

विभाग द्वारा इस पाइलट प्रोजेक्ट में 3 हजार किसान जोड़े जा चुके हैं। आने वाले समय में 7 हजार किसानों को और जोड़ना है। इस प्रोजेक्ट के प्रथम चरण के लिए 10 हजार किसानों का लक्ष्य रखा गया है। जैसे जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा। किसानों की संख्या में इजाफा किया जाएगा। इस परियोजना का ये एक छोटा सा हिस्सा है, बाकी 2600 करोड़ की इस परियोजना का पूरी डॉफ्टिंग का काम हो रहा है।

आने वाले 10 दिनों में ये पूरा हो जाएगा, जिसके बाद विभाग द्वारा कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाना है। इसके साथ इसे राष्ट्रीय सहकारी विकास परिषद के पास भेजा जाएगा। विभाग को उम्मीद है कि जून तक ये प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। आने वाली जुलाई से इस वृहद प्रोजेक्ट पर विभाग काम भी शुरू कर देगा।

अजस्र पीयूष