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संत धर्माचार्यों और मौलानाओं ने किया इलाहाबाद हाईकोर्ट के सुझाव का स्वागत

मौलानाओं ने किया हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत

लखनऊ। गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी का संत धर्माचाओं और मौलानाओं ने स्वागत किया है। विश्व हिन्दू परिषद और अखाड़ा परिषद ने जहां कोर्ट के सुझाव का स्वागत किया है वहीं मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, आल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और लखनऊ के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी कोर्ट के सुझाव का स्वागत करते हुए गो वध रोकने के लिए केन्द्रीय कानून बनाने की बात कही है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार को जल्द से जल्द गौ माता को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय हमारी सनातन संस्कृति का प्रतीक है।
अयोध्या के दिगम्बर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की भावनाओं को समझते हुए कोर्ट द्वारा की गयी टिप्पणी स्वागत योग्य है।
मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के महासचिव डा.मुईन अहमद ने कहा कि गौ हत्या को रोकने के लिए सरकार को केंद्रीय कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने कभी नहीं कहा कि गोमांस मुसलमानों का भोजन है,मानसिक बीमारी है किसी धर्म विचार को चिढ़ाने जैसा है।

आल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि कोई भी धर्म किसी की आस्था के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं देता। सरकार को भी उच्च न्यायलय के इस आदेश के पालन के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए और सख्त कानून बनाकर इस पर रोक लगानी चाहिए।
शाइस्ता अंबर ने कहा कि इस्लाम तो सर्वधर्म समभाव का पैरोकार रहा है। धर्म गुरुओं की जिम्मेदारी है कि वे इस मसले पर लोगों को जागरूक करें तभी समाजिक समरता की मिसाल कायम हो सकती है।

मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। बाबर ने भी हिंदू धर्म की आस्था की प्रतीक गाय के वध का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि गोवध को रोकना और उसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने का की पहल सरकार को करनी चाहिए।

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