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भगवान कृष्ण के द्वारा बनाए गये 84 खंभो को आज तक कोई क्यों नहीं गिन सका?

khamba 1 भगवान कृष्ण के द्वारा बनाए गये 84 खंभो को आज तक कोई क्यों नहीं गिन सका?

भगवान कृष्ण के चाहने वाले देश ही नहीं दुनिया में भी बसे हुए है। यही कारण है कि, उन्हें जब भी मौका मिलता है वो भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़े रहस्यों को जानने के लिए निकल पड़ते हैं। लेकिन जिस रहस्य के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। उसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे और भगवान कृष्ण की इस लीला को जानने के लिए निकल पड़ेंगे। राजस्थान के भरतपुर जिले के उपखंड कामां के बारे में भले ही कम लोगों ने सुना हो, लेकिन धार्मिक लोगों खासतौर पर वैष्णवों के बीच यह स्थान आधायत्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।

khamba 2 भगवान कृष्ण के द्वारा बनाए गये 84 खंभो को आज तक कोई क्यों नहीं गिन सका?

कामां का कुछ हिस्सा ब्रज भूमि से लगता है जहां भगवान कृष्ण ने अपना बचपन बिताया था। भादों महीने में यहां पर विशेष वन यात्रा होती है जिसमें देशभर से वैष्णव समाज के लोग हिस्सा लेते हैं। वहीं बारिश के मौसम में यहां के चील महल में मेला भी लगाया जाता है जिसे परिक्रमा मेला कहा जाता है।

इसी जगह पर स्थित है चौरासी खंभा मंदिर जिसके रहस्य दुनिया को अपनी तरफ खींचते हैं।इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां पर किसी देवी देवता की मूर्ति नहीं है और न यहां पर पूजा पाठ होती है। फिर भी इसे मंदिर के नाम से बुलाया जाता है। ये जगह बहुत ही अद्भुत है। यहां पर आपको बहुत सी आश्चर्य़जनक बातों का पता  चलेगा जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।चौरासी खंभों के बारे में कहा जाता है कि यहां पर बने खंभों को आज तक कोई गिन नहीं पाया है। जितनी बार इसे गिनने की कोशिश की गई है हर बार इसकी संख्या अलग होती है।
स्थानीय लोगों की मानें तो इस मंदिर के पास स्थित धर्म कुंड वही स्थान है जहां पर यक्ष ने युधिष्ठिर की परीक्षा ली थी। महाभारत में इस घटना के बारे में पढ़ने को मिलाता है।

कैसे बना 84 खंभों का मंदिर?
स्थानीय लोगों की मानें तो भगवान श्री कृष्ण अपने माता-पिता को चार-धाम की यात्रा का सुख गोकुल में ही देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने भगवान विश्वकर्मा से कहा था कि वो उनके घर में 84 खंबे लगा दें। इसपर विश्वकर्मा जी ने कहा था कि इन खंबों को कलियुग में कोई गिन नहीं पाएगा। इसीलिए ये मान्यता चली आ रही है कि अगर आप इस मंदिर के दर्शन करेंगे तो यहां पर आपको चार धाम की यात्रा का फल मिलेगा और साथ ही साथ आप इस मंदिर के खंबों को कभी गिन नहीं सकते।

मान्यता है कि यहां या तो एक खंबा ज्यादा गिनती में आएगा या फिर एक खंबा कम। अब आप सोचेंगे कि आखिर इस मंदिर में 84 खंबे ही क्यों हैं तो इसका जवाब भी उन पौराणिक कथाओं में मिलता है जो इस मंदिर की स्थापना के बारे में बताती हैं। मान्यता के अनुसार क्योंकि हिंदू धर्म में 84 लाख वर्णों का जिक्र है जिनसे होकर गुजरने के बाद इंसान को मनुष्य रूप मिलता है इसलिए इस मंदिर में 84 खंबे लगाए गए हैं। जो पूरे संसार में मौजूद जीवन के बारे में बताते हैं।

यह गोकुला में कृष्ण के बचपन के अतीत के सबसे महत्वपूर्ण पुरातत्व अवशेष हैं और उन्हें नंद भवन के रूप में भी जाना जाता है, और यह नंदा के महल परिसर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कहा जाता है।

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क्योंकि इस मंदिर को बनाते वक्त की विश्वकर्मा भगवान ने ये बात बोल दी थी कि, इस मंदिर के खंभों को कोई नहीं गिन पाएगा। इसीलिए आज तक इन खंभों को कोई गिन नहीं सका है।

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