08 हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, प्रेम के कारण बना यौन संबंधन रेप नहीं

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवा ब्रांच के हाल में ही सुनाए गए फैसले को लेकर कहा है कि किसी भी पुरुष को महिला के साथ यौन संबंध बनाने पर उसे रेप का दोषी नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जब दोनों के बीच गहरे प्रेम संबंधों का प्रमाण मौजूद हो, तब तथ्यों की गलत व्याख्या के आधार पर पुरुष को रेप का आरोपी नहीं माना जा सकता। योगेश पालेकर के मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ये फैसला सुनाया।

बता दें कि पालेकर पर एक महिला के साथ शादी का वादा कर रेप करने के आरोप में 7 साल जेल और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा हुआ था। हालांकि कोर्ट ने साल 2013 में इस मामले में आदेश देते हुए आरोपी पर से सजा और जुर्माने को हटा दिया था। दरअसल योगेश एक कैफे में काम करते थे और इस दौरान उनका अफेयर वहीं पर काम करने वाली एक लड़की के साथ हो गया। 08 हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, प्रेम के कारण बना यौन संबंधन रेप नहीं

महिला ने उन पर आरोप लगाया कि योगेश उन्हें घर वालों से मिलवाने के नाम पर घर ले गए, जहां वह रात में रुक गईं और दोनों के बीच संबंध बना। अगली सुबह योगेश ने महिला को उनके घर पर ड्रॉप किया। महिला के अनुसार योगेश ने इसके अलावा भी उनके साथ 3-4 बार संबंध बनाए। महिला ने इसके बाद आरोपी के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज करा दी।
कोर्ट ने अपनी सुनवाई में पाया कि महिला ने पालेकर को आर्थिक तौर पर भी मदद करती थी।

जस्टिस सी. वी. भदांग ने पाया कि दोनों के बीच सहमति केवल पालेकर के वादों पर ही नहीं बनी, बल्कि उनकी आपसी सहमति से बनी। महिला ना केवल पालेकर को आर्थिक सहायता देती थी, बल्कि गोवा में डिप्रेशन का इलाज कराने की वजह से उसने अपनी शिकायत भी वापस ले ली। कोर्ट ने इन सबके आधार पर कहा कि यह रेप नहीं बल्कि दोनों के बीच प्यार का संबंध था।

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