17 हजार फीट की ऊंचाई पर ग्लेसियरों में सेना की खतरनाक ट्रेनिंग

17 हजार फीट की ऊंचाई पर ग्लेसियरों में सेना की खतरनाक ट्रेनिंग

देहरादून। बर्फ के जांबाज हर हाल में बर्फ में केसे दुश्मनो को मात दे सकते हैं यह ITBP के हिमवीरों से ज्यादा कौन जान सकता है जून और जुलाई की तपती गर्मी के बाद भी इन दिनों ITBP के जवान 15 हजार से 17 हजार फीट की माणा ग्लेसियर और सतोपंथ की उंचाई पर प्रसिक्षण ले रहे हैं क्योंकि इस समय निचली जगहों पर बर्फ और ग्लेसियर नहीं हैं जिस कारन जवानों को इस वर्ष सबसे ऊंचाई वाले ग्लेसियर में जाना पड़ रहा है सुबह 6 बजे से दोपहर तक इस ऊंचाई वाली जगहों पर जवान बर्फ और ग्लेसियरों में ट्रेनिंग ले रहे हैं वही दोपहर के बाद हाई अल्टिटयूट में खेलों के माध्यम से अपने आप को व्यस्त रखते हैं।

 

 

बता दें कि भारतीय पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान ITBP औली के जवान पिछले दो महीने से इन कंदराओं में बर्फ कम ऑक्सीजन और ग्लेसियरों में अपनी प्रेक्टिश कर रहे हैं इस संस्थान में ट्रेनिंग के बाद ही जवान अर्टाकटिका जाते हैं यह ट्रेनिंग ही जवानों को हाई अल्टिटयूट कम ओकिशिजन और बर्फ में केसे दुस्मानो को मात देते हैं सिखाती है।

वहीं भारतीय पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान औली ITBP का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहाँ जवानों को बर्फ में स्किंग, रेस्क्यू दुश्मनो पर नजर रखना माउंन ट्रेनिग सहित तमाम वो तेयारिया सिखाई जाती है जिससे जवान कहीं भी किसी भी हाल में सामना कर सकता है इन दिनों माणा ग्लेसियर और सतोपंथ में जवानों की दिन रात प्रशिक्षण चल रही है जबरदस्त कड़ाके की ठण्ड रात को पारा माइनस 5 से निचे और दोपहर में 7 या 8 के साथ ऑक्सीजन की कमी हर समय बर्फ में प्रेक्टिश यही इन दिनों इन हिमवीरों की दिन चर्या है जवान कितना भी बारिश या बर्फ़बारी क्यों न हो जाये पर जवान अपना मनन लगाकर इन दिनों उंच हिमालय में बर्फ के दरों में पूरी जी जान से प्रसिक्षण ले रहे हैं , आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडर नरेंद्र सिंह रावत की माने तो इन कठिन हालातो में जवानो की ट्रेनिंग ही उन्हें फौलाद बनाती है लिहाजा ऐसी ट्रेनिंग के बाद जवाब हर बाधा पार कर सकते है।