September 20, 2021 5:42 am
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कोरोना वायरस के कारण इतिहास में पहली बार बंद हुए नाथद्वारा मंदिर के द्वार

नाथद्वारा मंदिर कोरोना वायरस के कारण इतिहास में पहली बार बंद हुए नाथद्वारा मंदिर के द्वार

नई दिल्ली: देश में कोरोना के खतरे के चलते सरकार ने कई स्थानों पर पाबंदी लगा दी है. स्कूल-कॉलेज समेत शॉपिंग मॉल को 31 मार्च तक बंद करने का आदेश जारी किया गया है. वहीं नाथद्वारा स्थित 337 साल पुराने श्रीनाथजी मंदिर को भी दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया गया है. बता दें कि इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब यह मंदिर बंद हुआ है.

श्रीनाथ मंदिर के प्रमुख तिलकायत राकेश गोस्वामी ने बताया कि “31 मार्च तक श्रीजी, प्रियाजी, मदनमोहन मंदिर व मंदिर मंडल के अधीनस्थ सभी धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। वहीं हिमाचल सरकार ने भी पारिवारिक समारोहों पर रोक लगा दी है. प्रदेश में स्थित सभी शक्तिपीठों के कपाट भी अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिए गए हैं.”

इतिहास : पुष्टिमार्गीय मत की प्रधान पीठ का सबसे बड़ा और 346 साल पुराना मंदिर है। विक्रम संवत 1728 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी (20 फरवरी 1672 शनिवार) को श्रीनाथजी पाट पर विराजे थे।

प्रतिमा का स्वरूप : श्याम वर्ण छवि। उर्ध्वभुजा (गिरिराज को धारण करने के भाव से) है। कमर वाले हिस्से पर दूसरी भुजा भक्तों को शरण में आने का संकेत देती हुई है। प्रभु जहां खड़े हैं, वहां की पीठिका गोल तथा ऊपर से चौकोर है। पीठिका में उर्ध्वभुजा की तरफ बैठे हुए दो मुनि, उनके नीचे एक सांप, नृसिंह और दो मयूर दर्शाते हुए हैं। दूसरी तरफ ऊपर की ओर एक मुनि, मेष, सांप तथा दो गायें हैं।

जन्माष्टमी-नंदोत्सव पर यह होगा : जन्माष्टमी पर सुबह 4 बजे शंखनाद के आधा घंटा बाद मंगला के दर्शन खुलेंगे। ठाकुरजी को धोती-उपरना धारण करवाकर तिलक-अक्षत लगाने के बाद पंचामृत स्नान करवाएंगे। र|ाभूषणों के भारी शृंगार में प्रभु सोने के बंगले में विराजेंगे। शयन आरती के बाद प्रभु की सेवा में खिलौने धराए जाएंगे। बाद में रिसाला चौक में तोपों से 21 बार सलामी लगेगी। नंदोत्सव पर दूध-दही से होली खेली जाएगी।

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