January 17, 2022 6:36 pm
featured धर्म

Utpanna Ekadashi 2021: उत्पन्ना एकादशी का व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

सीएम योगी ने दी देवशयनी एकादशी की शुभकामना

Utpanna Ekadashi 2021 || हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक मास में आने वाली एकादशी का महत्व माना जाता है। जिसका सभी की जीवनी पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। और इस बार ज्योतिष पंचांग के अनुसार 30 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी व्रत किया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार उत्पन्ना एकादशी का खास महत्व माना जाता है। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इस उत्पन्ना एकादशी को सभी पापों से मुक्त कराने वाली एकादशी के नाम से जाना जाता है। वहीं इस दिन विधि पूर्वक व्रत और पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती है। उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता का जन्म हुआ था इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इसी एकादशी से साल भर के एकादशी व्रत की शुरुआत की जाती है। इसके साथ ही उत्पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखकर उनकी पूजा की जाती है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

उत्पन्ना एकादशी का आरंभ 30 नवंबर 2021 को सुबह 4:13 से होगा। वही अतिथि का समापन अगले दिन यानी 1 दिसंबर को सुबह 2:13 पर होगा। 1 दिसंबर को व्रत का पारण सुबह 7:34 से 9:02 तक रहेगा। 

योगिनी एकादशी: इस व्रत के पीछे क्या है मान्यता, जानिए कैसे करें पूजन

व्रत की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु और मुर नामक एक राक्षस के बीच में युद्ध चल रहा था। राक्षस से युद्ध करते करते भगवान विष्णु थक गए थे। इसके बाद वह बद्रीकाश्रम की एक गुफा में जाकर विश्राम करने लगे। मुर नामक राक्षस ने भगवान विष्णु का पीछा किया और वह भी बद्रीकाश्रम की गुफा में पहुंच गया। वहां उसने भगवान विष्णु को निंद्रा की अवस्था में देखा। निंद्रा में लीन भगवान विष्णु को राक्षस मारना चाहता था। तभी भगवान विष्णु की शरीर से एक देवी प्रकट हुई और उस देवी नहीं मुर नामक राक्षस का तुरंत वध कर दिया। देवी के इस कार्य को देखकर भगवान विष्णु काफी प्रसन्न हैं और कहा देवी तुम्हारा जन्म कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को हुआ है। इसीलिए आज से तुम्हारा नाम एकादशी देवी होगा। तुम्हारा यह व्रत सभी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ माना जाएगा। आज से हर एकादशी को तुम्हारी पूजा होगी। जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ एकादशी का व्रत करेगा। उसे निश्चय ही सभी पापों से मुक्ति मिल जाएगी। 

महत्व

उत्पन्ना एकादशी का काफी अधिक महत्व माना जाता है मान्यताओं के अनुसार यह दिन एकादशी उपवास की उत्पत्ति का प्रतीक है। कहा जाता है कि इस दिन देवी एकादशी का जन्म हुआ था इसीलिए इस उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। दीदी एकादशी की उत्पत्ति राक्षस मूर वध करने के लिए हुई थी। जो भगवान विष्णु को मरने का इरादा रखते थे। दीदी एकादशी को भगवान विष्णु की शक्ति माना जाता है यह भगवान विष्णु की रक्षात्मक शक्तियों का एक रूप है। और जो भक्त वार्षिक एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं व उत्पन्ना एकादशी से एकादशी व्रत की शुरुआत करें।

उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ekadashi 2021: उत्पन्ना एकादशी का व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

पूजा विधि

उत्पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखकर उनकी पूजा की जाती है। एकादशी तिथि पर प्रात: काल उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा आरंभ करें। इस दिन शाम को भी भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। शाम की पूजा में मा लक्ष्मी जी की भी पूजा करें और मुख्य दरवाजे पर घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से लक्ष्मी जी का भी आर्शीवाद प्राप्त होता है। इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जरूरतमंदों को दान देना चाहिए। यह व्रत दो प्रकार से रखा जाता है, निर्जला और फलाहारी या जलीय व्रत। सामान्यतः निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए। अन्य या सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए। दिन की शुरुआत भगवान विष्णु को अर्घ्य देकर करें। अर्घ्य केवल हल्दी मिले हुए जल से ही दें। रोली या दूध का प्रयोग न करें। इस व्रत में दशमी को रात्री में भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी को प्रातः काल श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है।

Related posts

स्पुतनिक-V की भारत हर साल बनाएगा 100 मि​लियन डोज, रूस और भारत में हुआ समझौता

Trinath Mishra

फरवरी में हो सकते हैं उत्तरप्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव

Rahul srivastava

कंगना रनौत को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा, संजय राउत हैरान

Trinath Mishra