मंत्रिमंडल विस्तार
मंत्रिमंडल विस्तार

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश सरकार में मंत्रिमण्डल  विस्‍तार के कई बार कयास लगाये गये कि आगामी विधानसभा चुनाव 2022 को देखते हुए योगी आदित्‍यनाथ मंत्रिमण्डल का विस्‍तार करेंगे लेकिन अब इन कयासों पर विराम लग गय है। रही सही कसर केन्‍द्रीय मंत्रिमण्डल विस्तार ने पूरी कर दी। केन्‍द्रीय मंत्रिमण्डल विस्तार में जिस तरह उत्‍तर प्रदेश को विशेष तवज्‍जो देकर मोदी ने अपने मंत्रिमण्डल में यूपी से सात सांसदों को मंत्री बनाया है उससे यूपी का सामाजिक समीकरण भी साधने की कोशिश की गयी है। उत्‍तर प्रदेश में पिछडों की संख्‍या सर्वाधिक है। इसलिए उत्‍तर प्रदेश में सरकर बनाने और बिगाड़ने का मादा पिछड़े ही रखते हैं । इसलिए मोदी ने उत्‍तर प्रदेश के सात में से पांच मंत्री पिछड़े वर्ग से बनाये हैं ।

नियम के मुताबिक उत्‍तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाये जा सकते हैं। वर्तमान में 54 मंत्री हैं ऐसे में छ- मंत्रियों के पद रिक्‍त हैं। वहीं उत्‍तर प्रदेश विधानसभा में करीब तीन दर्जन से अधिक विधान परिषद की सीटें खाली हो रही हैं। इन सीटों पर समाज के विविध वर्ग के नेताओं का मनोनयन कर पार्टी अपने पक्ष में माहौल बनाने की फिराक में है।

जानकारों की मानें तो उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुत कम समय रह गया है ऐसे में सरकार की जरा सी चूक पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है । इसलिए मंत्रिमण्डल फेरबदल से फायदा कम नुकसान ज्‍यादा होने की उम्मीद है। ऐसे में सरकार अपनी बनी बनाई छवि को धूमिल नहीं करना चाहती । इसलिए सरकार अब मंत्रिमण्डल विस्तार न करके सीधे संगठन की योजना से सीधे चुनावी तैयारी करने के मूड में है। अभी तक यह कहा जा रहा था कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद मंत्रिमण्डल विस्तार होगा। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक भी हो गयी और संघ के साथ समन्‍वय बैठक भी हो गयी। लेकिन मंत्रिमण्डल विस्‍तार पर फैसला नहीं हो सका। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार और संगठन मंत्रिमण्डल विस्‍तार न करने पर सहमत हो गये हैं हां इतना जरूर है कि जिन विभागों के मंत्रियों के बारे में समाज में गलत धारणा है उनकी कार्यशौली में सुधार लाने को कहा गया है। रविवार को संपन्‍न समन्‍वय बैठक में भी कई पदाधिकारियों की शिकायत थी कि सरकार के मंत्री कार्यकर्ताओं का काम नहीं करते हैं ।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्‍ता राकेश त्रिपाठी ने बताया कि मंत्रिमण्डल का विस्तार करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। मुख्यमंत्री जी जब चाहेंगे मंत्रिमण्डल विस्‍तार कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि इसी उत्‍तर प्रदेश में भारी-भरकम मंत्रिमण्डल हुआ करता था। भाजपा सरकार ने मानक से भी कम मंत्री बनाकर एक आदर्श प्रस्‍तुत किया है।

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