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राजकोट टेस्ट पर खतरे के बादल, बीसीसीआई ने ली सुप्रीम कोर्ट की शरण

BCCI राजकोट टेस्ट पर खतरे के बादल, बीसीसीआई ने ली सुप्रीम कोर्ट की शरण

नई दिल्ली। बुधवार से राजकोट में शुरु हो रहे भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। मामला बीसीसीआई का है, मैच को सुचारु रुप से चलाने के लिए बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में फंड जारी करने की मांग की है। आपको बता दें कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को ना लागू करने को लेकर लोढ़ा कमेटी ने बोर्ड पर बड़े अमाउंट जारी रखने पर रोक लगाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई आज दोपहर दो बजे करेगा।
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इन दिनों मंजर यह है कि दुनिया से सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के पास आज पैसों की कमी आ गई है। लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को ना मानने का अंजाम कुछ ऐसा है कि बीसीसीआई के पास इस वक्त कंगाली सी आ गई है। इंग्लैंड के साथ 9 नवंबर से शुरु हो रहे पहले टेस्ट मैच के लिए बीसीसीआई ने फंड जारी करने की मांग को लेकर एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बीसीसीआई का कहना है कि अगर फंड नहीं मिलता है तो वह राजकोट टेस्ट मैच को करवा पाने की स्थिति में नहीं है।

न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे और न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की खंडपीठ के सामने पेश होते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर बीसीसीआई को फंड जारी नहीं किए गए तो राजकोट टेस्ट रद्द किया जा सकता है।सिब्बल ने न्यायालय से इस मामले में त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया। दूसरी ओर, लोढ़ा समिति के वकील गोपाल एस. ने न्यायालय को बताया कि बीसीसीआई ने न्यायालय के 21 अक्टूबर के आदेश को नहीं माना है।गोपाल एस. ने कहा कि न्यायायालय द्वारी स्वीकृत लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार बीसीसीआई को शर्तो के मानने से पहले किसी भी प्रकार का फंड नहीं दिया जाना चाहिए।

इस पर सिब्बल ने कहा, “ठीक है कि हमने (बीसीसीआई) ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया लेकिन इसके बावजूद लोढ़ा समिति को फंड जारी करने को कहा जाए क्योंकि अगर फंड नहीं मिला तो राजकोट टेस्ट रद्द किया जा सकता है।इस पर न्यायमूर्ति दवे ने कहा कि वह इस मामले में प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर से भोजनकाल के दौरान मिलेंगे और कोई भी फैसला लेने से पहले उनसे चर्चा करेंगे।

बीसीसीआई की अपील पर आज दोपहर को दो बजे सुनवाई होनी है जिसमें यह फैसला लिया जाना है कि आगे बीसीसीआई को फंड दिया जाना है या नहीं। आपको यहां पर याद दिला दें कि पिछले महीने बीसीसीआई पर शिकंजा कसते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य संघों को मिलने वाले पैसों पर रोक लगा दी थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि जब तक बीसीसीआई लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को मानता नहीं है तब तक उसे किसी भी प्रकार का पैसा आवंटित नहीं किया जाएगा।

ये हैं लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें आपको यहां बताएं कि बीसीसीआई और लोढ़ा कमेटी के बीच का गतिरोध कई महीनो से चला आ रहा है। पिछले साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को नई सिरे से खड़े करने के लिए न्यायमुर्ति लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठिक किया था जिसको यह जिम्मेवारी दी गई थी। समिति ने जो सिफारिशें की थीं, जिसको लागू करने को लेकर आज बात की गई है उसके अनुसार-

  • बीसीसीआई के किसी भी पदाधिकारी की आयु 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • बोर्ड में कार्यरत कोई भी पदाधिकारी सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
  • बीसीसीआई की गवर्निंग काउंसिल में नियंत्रक और कैग के भी एक सदस्य के शमिल होने की बात पर जोर दिया गया था।
  • सट्टेबाजों को लेकर संसद को सख्त कानून बनाने की भी बात कही गई थी।
  • बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए हर संभव नियम बनाने की भी बात कही गई थी।

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