1 अक्षय तृतीय क्यों मनाई जाती है? इस दिन भूलकर भी न करें ये काम वरना पूरे साल रहेंगे परेशान..

अक्षय तृतीय हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल यह पावन दिन 26 अप्रैल, रविवार को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन बेहद ही शुभ होता है। कहा जाता है अगर इस दिन किसी शुभ कार्य को किया जाए तो लाभ ही लाभ मिलता है। तभी को अक्षय तृतीय के दिन सबसे ज्यादा विवाद होते हैं। हिन्दू धर्म में इस पर्व को बहुत ही पावन माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान बहुत ही शुभ होता है। इसलिए हो सके तो इस दिन कुछ न कुछ जरूर दान करें।

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धार्मिक मान्यताओं की मानें तो इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इनकी पूजा करने से मन की इच्छाएं पूरी होती हैं।
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्‍णु के छठें अवतार भगवान परशुराम का जन्‍म हुआ था। परशुराम महर्षि जमदाग्नि और माता रेनुकादेवी के पुत्र थे। यही वजह है किनअक्षय तृतीया के शुभ दिन भगवान विष्‍णु की उपासना के साथ परशुराम जी की भी पूजा करने का विधान बताया गया है।

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26 अप्रैल को पड़ने वाली अक्षय तृतीय की पूजा का समय
अक्षय तृतीया का मुहूर्त-
तृतीया तिथि प्रारंभ: 11:50 बजे (25 अप्रैल 2020)
तृतीया तिथि समापन: 13:21 बजे (26 अप्रैल 2020)
अक्षय तृतीया पर कौन-कौन से काम न करें
अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न करें ये काम
अक्षय तृतीया पर घर में क्लेश नहीं करना चाहिए। इस दिन घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। वाद-विवाद से बचें। नशा न करें। धर्म के अनुसार कर्म करें। अधार्मिक कर्म करने वाले लोगों को अक्षय तृतीया पर किए गए दान-पुण्य का पूरा फल नहीं मिल पाता है।

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