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9वें दौर की बातचीत: कानून वापसी की मांग पर अड़े किसान, कृषि मंत्री ने बोले, “कानून तो वापस नहीं होंगे”

WhatsApp Image 2021 01 15 at 3.37.46 PM 9वें दौर की बातचीत: कानून वापसी की मांग पर अड़े किसान, कृषि मंत्री ने बोले, "कानून तो वापस नहीं होंगे"

नई दिल्ली। किसान आंदोलन को आज 51वां दिन है और शुक्रवार को नौवें दौर की बातचीत विज्ञान भवन में शुरु हो चुकी है। इसी बीच खबर यह आ रही है कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमन ने किसानों से कहा है कि सरकार ने किसानों की अधिक्कतर मांगे मान ली है। इसी बीच विज्ञान भवन पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कहेगा तो नहीं निकालेंगे टैक्टर मार्च। किसान अपनी कानून वापस लेने की मांग पर अडे हैं। हर बार की तरह इस बार भी बैठक किसी नतीजे पर पहुंती नहीं दिख रही। फिलहाल अभी बैठक में लंच हो गया है। इस बार भी किसानों का लंच बाहर से ही आया है।

केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच शुक्रवार को एक बार फिर बातचीत का दौर चला। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के बाद सरकार-किसान के बीच हुई ये पहली बैठक है। लेकिन इस बार भी कुछ अलग नहीं दिखा। किसान संगठनों की ओर से अब भी कृषि कानून वापस लेने की मांग की जा रही है। जबकि सरकार संशोधनों का हवाला दे रही है। ऐसे में ये गतिरोध किस तरह खत्म होता है। इसपर हर किसी की नज़रें हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों ने बैठक में कहा कि किसान मीडिया में कहते हैं कि सरकार जिद पर अड़ी है, लेकिन हमने किसानों की बातें मान ली हैं। किसान एक भी कदम आगे नहीं बढ़े हैं। दूसरी ओर बैठक में पीयूष गोयल ने किसानों ने थ्ब्प् से जुड़ी जानकारी दीण् हालांकिए किसान लगातार बैठक में कानूनों को रद्द करने के मसले पर अड़े हुए हैंण्

किसानों की ओर से सरकार के सामने पंजाब में हो रही छापेमारी, हरियाणा में किसानों पर लिए गए एक्शन के मसले को उठाया गया और सभी मुकदमे वापस लेने की मांग की गई। अभी बैठक में लंच हो गया है। इस बार भी किसानों का लंच बाहर से ही आया है।

 

किसानों के मुद्दे पर क्या बोले रामदास अठावले-

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बयान दिया है कि देश के किसान नेता किसानों को तकलीफ दे रहे हैंए इस ठंड में उन्हें बर्बाद करने का काम कर रहे हैंण् उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी दोगुनी करना सरकार का मकसद है और ये कानून उसी से जुड़ा हैण् सरकार किसान बिल में संशोधन करने को तैयार है और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी निर्णय आएगा केंद्र सरकार उसे मानेगी और किसानों को भी उनका निर्णय मानना चाहिए।

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