तीन तलाक के विरोध में महिला ने सीजेआई को लिखा ‘खून से खत’

नई दिल्ली। देश में तीन तलाक के विरोध का विरोध यू तो काफी दिनों से होता आ रहा है, महिलाएं भी इसके विरोध मंे खड़ी हैं और स्वयं के लिए न्याय और समानता की गुहार करती नजर आ रही हैं, सरकार की तरफ से पहले ही कहा जा चुका है कि यह कुप्रथा समाज के लिए एक बोझ है इससे समाज मंे लिंग भेद बढ़ता है। इसी सिलसिले मंे एक नए मामले में एक मुस्लिम महिला ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को खून से खत लिखकर अपने लिए न्याय की मांग की है। खत में महिला ने लिखा है कि तीन तलाक को देश से प्रभावी तरीके से समाप्त किया जाए।muslim

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे खत में महिला ने लिखा है कि देश से तीन तलाक कानून को खत्म किया जाए, देश में ऐसा कानून होना चाहिए जिससे लोगों को समानता मिले, लिंग भेद ना हो। मेरे पति ने मुझे तलाक दे दिया है, मैं ऐसे किसी भी कानून को नहीं मानती जिसके कारण मेरी और मेरी चार साल के बच्ची की जिंदगी तबाह हो गई है, अगर मुझे इंसाफ नहीं दिया जा सकता है तो मुझे अपनी जान देने की अनुमति दी जाए।

मामले के अनुसार शबाना नाम की औरत की 25 मई 2011 को हुई, पति का नाम टीपू है। शबाना बताती है कि वो नर्सिंग कर चुकी है, पर उसका पति उसे खेतों मंे काम करवाना वाहता था, जब वह ऐसा करने से मना करती तो वो उसे मारता भी था, उसे दहेज के लिए प्रताडित किया जाता रहा। बाद में पति ने किसी और से शादी कर ली, जिसके बाद शबाना ने इसकी रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई, और बाद में काफी बातें बढ़ी जिसके बाद टीपू ने उसे तलाक दे दिया। ऐसे में उसका और उसकी चार साल की बेटी तहजीब की जिंदगी बर्बाद सी हो गई है। महिला ने खून से लिखे खत में लिखा है कि मुझे यह तलाक ना तो मंजूर है और ना ही मैं तलाक के इस नियम को मानती हूं। देश से ऐसे कानून को समाप्त किया जाए और मुझे और मेरी बेटी को न्याय मिले।