दीवाली से ठीक एक दिन पहले करें काली चौदस की पूजा…दूर होगी बाधाएं

नई दिल्ली। दुर्गा मां का सातवा रूप शक्ति और कालरात्रि नाम से भी जाना जाता है। देवी कालरात्रि शत्रुओं का विनाश करती है। ऐसी मान्यता है कि देवी मां के इस स्वरूप की पूजा करने से सारी बाधांए दूर होती हैं। देवी के इस स्वरूप की व्याख्या मारकंडे पुराण में मिलती है जिसके अनुसार मां कालरात्रि अपने इस रूप में गधे पर सवार हैं और उनके एक हाथ में खडग और दूसरे में मुंडमाला है। इस पर्व को काली चौदस या नरक चर्तुथी के रूप में भी मनाया जाता है।

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काली चौदस के दिन ऐसे करें पूजा:-

– आज के दिन सूर्योदय के समय उठकर तुरंत स्नान करें।

– पूजा के समय अपने शरीर पर इत्र लगाए।

– घर में मां काली की प्रतिमा की स्थापना करें।

– इसके बाद नई चुनरी, वस्त्र, चूड़ी आदि से मां काली का साज-श्रृंगार करें।

– कालरात्रि मां के सामने दीप प्रज्ज्वलन करें और मां की हल्दी, कुमकुम और कपूर चढ़ाकर पूजा करें।

– मां का ध्यान पूरे मन से करें।

– मन लगाकर पूजा करने से सुख-शान्ति मिलेगी और जीवन में नवीन सोच का प्रवाह होगा।

– इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है।

– इस दिन हनुमान जी के श्लोक का करें उच्चारण करना होगा शुभ – “आश्विनस्यासिते पक्षे भूतायां च महानिशि । भौमवारे अंजनादेवी हनुमंतमजीजनत “

शास्त्रों के अनुसार आश्विन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को अंजनादेवी के उदार से हनुमान जी का जन्म हुआ था। जिस वजह से इसी दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। हालांकि हनुमान जी के अवतार की अन्य तिथियां भी प्रचलित है जैसे चैत्र पूर्णिमा, चैत्र शुक्ल एकादशी ।