इन कारणों के चलते साइरस को टाटा समूह ने किया बाय-बाय !

नई दिल्ली। व्यापार के क्षेत्र मे अंबानी बंधुओ के बीच के तनाव के बाद से साइरस मिस्त्री को अध्यक्ष पद से हटाया जाना बड़ा हलचल माना जा रहा है। हालांकि यह फैसला टाटा समूह के द्वारा लिया गया पर रतन टाटा ने ही साइरस को बाहर का रास्ता दिखाया यह साफ है। नौ सदस्यीय बोर्ड की अध्यक्षता में रतन टाटा ने वोट नहीं किया साथ ही साइरस मिस्त्री के अध्यक्ष पद से हटने के मामले में रतन टाटा स्वयं टाटा के अंतरिम अध्यक्ष बन गए हैं। अन्य आठ सदस्यों में से छह ने मिस्त्री के खिलाफ वोट दिया,जबकि दो लोगों के अनुपस्थिति के अभाव में उनके वोट का प्रभाव नहीं माना गया।

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व्यापार के क्षेत्र मे दीपावली के इस धमाके को समझन के लिए यह जानना जरुरी है कि इसके पीढे के कारण क्या हैं। हम आपको बतातं है कि इनके पीछे क्या कारण हो सकते हैं।

टाटा और साइरस के बीच का मतभेद- रतन टाटा व्यापार को बढ़ाने के लिए काम करना चाहते थे लकिन मिस्त्री के नियमों के आधार पर समूह के विकास की गति ठहर गई। साइरस रतन टाटा के सुझाव को गंभीरता से नहीं ले गए थे।

साइरस की टीम थी कमजोर– साइरस जिस टीम के साथ काम कर रहे थे वह नए चुनौतियों को लेने को तैयार नही थी। खबरें ऐसी भी आ रही थी कि रतन टाटा, जापान की डोकोमो और टाटा के ब्रेक अप की हैंडलिंग के साथ खुश नहीं थे।

दूरदर्शी सोच में साइरस असफल- गु्रप से रिटायरमेंट के बावजूद भी रतन टाटा कार्यवाही पर पूरी निगरानी बनाए हुए थे। वो लगातार व्यापार क्षेत्र में बड़े ओहदे वाले लोगों के संपर्क में थे, वहीं साइरस अपने दैनिक कार्याे में व्यस्त रहते थे, ग्रुप के भविष्य के बारे मंे वो दैनिक कामों से फुर्सत नहीं पा रहे थे। टाटा द्वारा जारी किए गए विज्ञप्ति में भी यह कहा गया था कि व्यापार के भविष्य को अच्छा करने के लिए साइरस को हटाकर नए अध्यक्ष का चुनाव जरुरी है।